सरकार जल्द ही बैंकिंग पर उच्च स्तरीय समिति का गठन करेगी: सीतारमण

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नयी दिल्ली, आठ फरवरी (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार विकसित भारत की वित्त पोषण जरूरतों को पूरा करने में सक्षम बड़े बैंक बनाने का खाका तैयार करने के लिए जल्द ही ‘विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्च स्तरीय समिति’ का गठन करेगी।

उन्होंने पीटीआई वीडियो को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ”हम चाहते हैं कि समिति हमें बताए कि हमें किस तरह के कदम उठाने की जरूरत है ताकि विकसित भारत के वित्त पोषण के लिए बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।”

यह पूछने पर कि क्या यह समिति सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय का सुझाव देगी, सीतारमण ने कहा कि किसी को इसे इस तरह सीमित दायरे में नहीं देखना चाहिए।

उन्होंने कहा, ”यह भारत के बैंकिंग क्षेत्र को इतना बड़ा बनाने के लिए है कि वह विकसित भारत के वित्त पोषण का ध्यान रख सके। आपको विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुंचना है… इसके लिए धन, वित्त पोषण, ऋण और आम आदमी तक बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच की आवश्यकता है।”

समिति के गठन की समय सीमा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ”हम इसे जल्द से जल्द करेंगे।”

उन्होंने एक फरवरी को बजट भाषण में कहा था, ”मैं वित्तीय स्थिरता, समावेश और उपभोक्ता संरक्षण को सुरक्षित रखते हुए, बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा करने और इसे भारत के विकास के अगले चरण के अनुरूप तैयार करने के लिए ‘विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्च स्तरीय समिति’ स्थापित करने का प्रस्ताव करती हूं।”

सार्वजनिक क्षेत्र की एनबीएफसी में दक्षता सुधारने के लिए बजट में पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (पीएफसी) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन (आरईसी) के पुनर्गठन का प्रस्ताव भी दिया गया था। विलय की संभावना के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ”संबंधित मंत्रालय में काफी काम हुआ है। देखते हैं कि वे इसे कैसे आगे बढ़ाते हैं।”

पीएफसी और आरईसी दोनों ही ‘नवरत्न’ केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम हैं, और यह अधिग्रहण एक ही क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों को एकीकृत करने की दिशा में एक कदम है।

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