जम्मू कश्मीर के लोगों को राष्ट्रीय मुख्यधारा में लाने के लिए सरकार प्रयासरत : शोभा करंदलाजे

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नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार जम्मू कश्मीर के युवाओं को राष्ट्रीय मुख्यधारा में लाने और उन्हें गलत रास्ते पर जाने से रोकने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।

उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री करंदलाजे ने कहा कि एक समय था जब जम्मू-कश्मीर में पथराव की घटनाएं आम थीं, लेकिन अब केंद्र शासित प्रदेश रोजगार सृजन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि पिछले सात साल में जम्मू कश्मीर में 1.6 लाख नए ग्राहक ईपीएफओ से जुड़े हैं जो जम्मू कश्मीर के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है।

उन्होंने कहा, “हम प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जम्मू कश्मीर के लोगों को राष्ट्रीय मुख्यधारा में लाने और उन्हें गलत रास्ते पर जाने से रोकने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।”

करंदलाजे ने कहा, “…आप (विपक्ष) हमेशा बाधा बनकर रुकावटें खड़ी करते रहे हैं। लेकिन हमारा मकसद जम्मू कश्मीर के युवाओं को बचाना और उन्हें नए रोजगार उपलब्ध कराना है।”

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जम्मू कश्मीर को आगे ले जाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पहली बार, जम्मू कश्मीर बैंक ने ऋण गारंटी योजना के तहत लगभग 14,490 करोड़ रुपये दिए हैं जो देश में सबसे अधिक है।

करंदलाजे ने कहा, “मैं आपको एक उदाहरण दे सकती हूं, जब मेरी एक उड़ान में एक लड़की से मुलाकात हुई, तो उसने कहा कि देश के इतिहास में पहली बार कोई प्रधानमंत्री जम्मू कश्मीर के बच्चों के बारे में सोच रहे हैं।”

प्रधानमंत्री मोदी उस समय राज्यसभा में मौजूद थे।

मंत्री ने कहा, ‘‘हमने जम्मू कश्मीर में क्रिकेट बल्ले के निर्माण के लिए नौ अलग-अलग क्लस्टर भी बनाए हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार जम्मू कश्मीर के युवाओं के लिए रोजगार को औपचारिक रूप देने की दिशा में काम कर रही है और ईपीएफओ इसका प्रमाण है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में ईपीएफओ में लगभग 1,60,000 लोग पंजीकृत हुए हैं।

करंदलाजे ने कहा कि ऋण गारंटी योजना के तहत देश भर के उद्यमियों को 12 लाख करोड़ रुपये के ऋण दिए गए हैं, और जम्मू कश्मीर में भी ऋण दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत, ‘‘हमारा लक्ष्य चार साल में 30 लाख लोगों को पंजीकृत करना था, लेकिन हमने केवल दो साल में ही 30 लाख लोगों को पंजीकृत कर लिया और 22 लाख लोगों को प्रशिक्षण दिया। हमने उन्हें टूलकिट भी प्रदान किए हैं।’’

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