गौरव गोगोई असम कांग्रेस का सिर्फ चेहरा, रकीबुल हुसैन इसके ‘मुख्य कर्ताधर्ता’ : भूपेन बोरा
Focus News 18 February 2026 0
गुवाहाटी, 18 फरवरी (भाषा) कांग्रेस की असम इकाई के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने बुधवार को दावा किया कि विपक्षी पार्टी की प्रदेश इकाई अब गौरव गोगोई के नियंत्रण में नहीं है और धुबरी के सांसद रकीबुल हुसैन इसके “मुख्य कर्ताधर्ता” हैं।
भूपेन बोरा ने ‘पीटीआई-वीडियो’ के साथ साक्षात्कार में दावा किया कि असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई अब केवल “पार्टी का चेहरा” हैं। उन्होंने दावा किया, “धुबरी सीट पर 10 लाख से अधिक वोट से जीत हासिल करने वाले रकीबुल हुसैन ही पार्टी के मुख्य कर्ताधर्ता हैं।”
बोरा ने कहा कि सोमवार को उनके द्वारा कांग्रेस आलाकमान को अपना त्यागपत्र भेजने के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उन्हें फोन किया और ‘‘2007 से हमारे संबंधों के बारे में विस्तार से बात की।’’
उन्होंने दावा किया, ‘‘उन्होंने (राहुल गांधी ने) इसका उल्लेख किया कि कैसे हमने मिलकर पार्टी को आगे बढ़ाया जो सच है, लेकिन उन्होंने मेरे त्यागपत्र के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा।’’
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने मंगलवार शाम को बोरा के आवास पर उनसे मुलाकात के बाद घोषणा की कि बोरा 22 फरवरी को भाजपा में शामिल होंगे।
सोलह विपक्षी दलों के मोर्चा ‘असम सन्मिलिता मंच’ के अध्यक्ष रहे बोरा ने कहा कि 2024 में पांच विधानसभा सीट पर उपचुनाव से पहले यह तय किया गया था कि बेहाली सीट से भाकपा (माले) का एक उम्मीदवार चुनाव लड़ेगा, क्योंकि पिछले चुनाव में पार्टी को 40,000 वोट मिले थे।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने इस प्रस्ताव पर सहमति जतायी, लेकिन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने मेरे प्रस्ताव पर विचार नहीं किया और प्रदेश इकाई के दो-तीन नेताओं ने अन्य नामों पर भी चर्चा शुरू कर दी। अंततः, एक ऐसे व्यक्ति को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया गया जो तब तक पार्टी का सदस्य भी नहीं था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘गठबंधन में शामिल अन्य दलों के नेताओं ने मुझसे कहा था कि अगर आप पांच सीट में से एक भी सीट नहीं छोड़ सकते, तो अगले चुनाव में 126 सीट के बारे में चर्चा करने के लिए क्या बचता है। तब मैंने नैतिक आधार पर गठबंधन के प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया और कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव में बुरी तरह हार गए।”
बोरा ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में यह मुद्दा उठाया था, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि साथ ही उन्हें व्यक्तिगत अपमान का भी सामना करना पड़ा, “अब इस बारे में बात करने का समय नहीं है।”
बोरा ने दावा किया कि उन्होंने एक महीने पहले गोगोई को पत्र लिखकर कहा था कि वह उनके खिलाफ एक संवाददाता सम्मेलन करेंगे क्योंकि “मैं अब और अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता।”
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने यह पत्र वरिष्ठ नेताओं के साथ साझा किया था, जिसमें राज्य प्रभारी भी शामिल थे, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। मुझे एहसास हुआ कि पार्टी में मेरी कोई आवश्यकता नहीं है, इसलिए मैंने इस्तीफा दे दिया।’’
बोरा ने कहा कि कांग्रेस के राज्य प्रभारी जितेंद्र सिंह ने नौ फरवरी को पार्टी के छह नेताओं के साथ एक बैठक की थी और उन्हें विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी गठबंधन की बातचीत आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई थी।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने वह स्वीकार किया क्योंकि यह पार्टी का निर्णय था और मुझे यह भी लगा कि गठबंधन आवश्यक है क्योंकि कांग्रेस अकेले भाजपा का सामना नहीं कर सकती। मैंने महसूस किया कि भाजपा विरोधी वोट को एकजुट करने की जरूरत है, जिससे विधानसभा चुनाव में अच्छा मुकाबला सुनिश्चित होगा।’’
उन्होंने कहा कि अगले दिन उन्हें गौरव गोगोई का फोन आया, जिन्होंने कहा कि ‘‘आप अकेले नहीं हैं, बल्कि रकीबुल हुसैन गठबंधन वार्ता को आगे बढ़ाने में आपके साथ होंगे।’’
बोरा ने दावा किया, ‘‘मैंने उनसे कहा कि यह वह निर्णय नहीं है जो बैठक में लिया गया था। हालांकि, सांसद होने के नाते वह वहां रह सकते हैं, लेकिन गौरव ने इस बात पर जोर दिया कि उन्हें सक्रिय रूप से इसमें शामिल होना चाहिए। इस बीच, नागांव से कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने मुझे फोन कर कहा कि अगर रकीबुल वहां हैं, तो वह इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इस बीच, गौरव ने सार्वजनिक रूप से कहा कि मैं गलत जानकारी फैला रहा हूं कि मुझे गठबंधन वार्ता का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई है। मैंने उनसे सवाल किया कि आप ऐसा क्यों कह रहे हैं, जबकि मैं अखिल गोगोई सहित अन्य दलों के नेताओं से पहले ही बात कर चुका था और उन्होंने मीडिया को इसके बारे में बताया।’’
बोरा ने इसे सार्वजनिक अपमान बताया। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कांग्रेस को 32 साल दिए। मैं डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय में पढ़ रहा था जब तत्कालीन मुख्यमंत्री हितेश्वर सैकिया आए और मुझे कांग्रेस में शामिल होने का निमंत्रण दिया, ठीक वैसे ही जैसे वर्तमान मुख्यमंत्री कल मेरे आवास पर आए और मुझे भाजपा में शामिल होने के लिए कहा।’’
कांग्रेस में अपने दिनों को याद करते हुए बोरा ने बताया कि राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान गुवाहाटी के पास उनकी नाक से खून भी निकला था।
