मंत्रियों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए भ्रष्टाचार के मामलों का इस्तेमाल करते हैं फडणवीस : राउत

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मुंबई, 23 फरवरी (भाषा) शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने सोमवार को आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पहले भ्रष्टाचार के मामलों में मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करते हैं और फिर उन्हें ‘क्लीन चिट’ दे देते हैं, ताकि वह उन पर नियंत्रण बनाए रख सकें।

राउत की यह टिप्पणी महाराष्ट्र के एक मंत्री के कार्यालय में रिश्वतखोरी का कथित मामला सामने आने के कुछ दिनों बाद आई है।

शिवसेना (उबाठा) सांसद ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में दावा किया कि राज्य के सभी मंत्री भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) भले ही उन पर कड़ी नजर रख रहा है, लेकिन जब तक फडणवीस निर्देश नहीं देते, तब तक वह कोई कार्रवाई नहीं करेगा।

राउत ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के मामले में फडणवीस को “पाखंडी” करार दिया।

उन्होंने रिश्वतखोरी के सिलसिले में मंत्री नरहरि जिरवाल के विभाग के एक अधिकारी के खिलाफ एसीबी की हालिया छापेमारी का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि फडणवीस मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करते हैं, उनके खिलाफ छापे मरवाते हैं और बाद में उन्हें ‘क्लीन चिट’ दे देते हैं, ताकि वह उन पर नियंत्रण बनाए रख सकें।

राउत ने कहा, “भ्रष्टाचार के खिलाफ आपका यही रुख है। सरकार यह संदेश दे रही है कि भ्रष्टाचार में लिप्त रहो, लेकिन उनके (फडणवीस के) नियंत्रण में रहो। भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के मामले में फडणवीस पाखंडी हैं।”

उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री कार्यालय समेत सरकार के हर विभाग में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार व्याप्त है।

राउत ने आरोप लगाया, “फर्क सिर्फ इतना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय में सफेदपोश भ्रष्टाचार होता है।”

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता जिरवाल का जिक्र करते हुए राउत ने कहा कि वह “बेचारे गरीब आदिवासी मंत्री” हैं, जो कथित रिश्वतखोरी मामले में मुद्दों को संभालने में असमर्थ रहे और उन्हें “बलि का बकरा” बना दिया गया।

शिवसेना (उबाठा) नेता ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के सभी मंत्री भ्रष्टाचार में लिप्त हैं।

उन्होंने कहा, “हालांकि, एसीबी मंत्रियों पर कड़ी नजर रख रही है, लेकिन मुख्यमंत्री का निर्देश मिलने तक वह उनके कार्यालय में प्रवेश नहीं करेगी। उपमुख्यमंत्री (और राकांपा नेता) सुनेत्रा पवार के अधीन मंत्री रहे जिरवाल महज एक ‘बलि का बकरा’ हैं।”

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