अशिक्षितों से दस्तावेज मांगे जा रहे, प्रधानमंत्री की डिग्री अब भी सार्वजनिक नहीं: रेवंत रेड्डी

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हैदराबाद, तीन फरवरी (भाषा) तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का शैक्षणिक प्रमाणपत्र सार्वजनिक नहीं किया गया है जबकि निर्वाचन आयोग द्वारा शुरू किए गए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान अशिक्षितों और गरीबों से कई दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने यह बात सोमवार को यहां भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के दिवंगत नेता रवि नारायण रेड्डी की स्मृति में स्थापित पुरस्कार शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को प्रदान करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में कही।

इस दौरान उन्होंने फोन टैपिंग मामले में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) पर भी निशाना साधा और पार्टी अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) से पूछताछ किए जाने के खिलाफ पार्टी के विरोध प्रदर्शन करने की आलोचना की।

उन्होंने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के प्रस्ताव का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि यह देश में ‘एक व्यक्ति-एक पार्टी’ शासन लाने का प्रयास है।

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 2024 के लोकसभा चुनावों में ‘संविधान मिटाने’ के लिए 400 सीटें चाहिए थीं। उन्होंने कहा कि जनहित में संवैधानिक संशोधन करने के लिए साधारण बहुमत ही पर्याप्त होता है।

उन्होंने कहा, ‘‘ भाजपा को स्पष्ट बहुमत न मिलने के बाद पार्टी अब एसआईआर के जरिए अशिक्षित और गरीब लोगों के मतदान अधिकार छीनने की साजिश रच रही है।’’

रेड्डी ने कहा, “राहुल गांधी ने मोदी का शैक्षणिक प्रमाणपत्र मांगा था लेकिन उसे उजागर नहीं किया गया।”

उन्होंने कहा, “जब आपका शैक्षणिक प्रमाणपत्र एक रहस्य है… ऐसे में यदि जिन्हें शिक्षा का अवसर नहीं मिला, ऐसे अशिक्षितों और गरीबों का मताधिकार कई शर्तें लगाकर छीन लिया जाता है तो उनके पास राशन कार्ड, आधार कार्ड, जमीन और सरकारी योजनाएं नहीं होंगी। इसके पीछे एक साजिश है और गरीबों को दबाने का विचार है।”

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