बेंगलुरु, 11 फरवरी (भाषा) भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने बुधवार को कहा कि अंतर्निहित जटिलताओं और अनिश्चितताओं के बावजूद भारत को अपने महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम को निरंतर उत्साह और लगन के साथ आगे बढ़ाना चाहिए।
अशोक चक्र से सम्मानित शुक्ला ने कहा कि गगनयान अभियान की सफलता भारत को अंतरिक्ष अन्वेषण करने वाले चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल करा देगी।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “मुझे लगता है कि एक राष्ट्र के रूप में, मिशन गगनयान के माध्यम से हम जो प्रयास कर रहे हैं, ऐसा दुनिया के केवल तीन अन्य देशों ने ही किया है।”
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अनुसार, भारत का लक्ष्य 2027 में गगनयान का प्रक्षेपण करना है। ग्रुप कैप्टन शुक्ला इस मिशन के लिए चयनित चार अंतरिक्ष यात्रियों में से एक हैं।
उन्होंने कहा, “ये अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण मिशन हैं। हम एक साहसिक प्रयास कर रहे हैं, और चाहे इसमें कितना भी समय लगे, हमें उसी उत्साह के साथ काम करते रहना होगा। जो मेरे भीतर पहले दिन था, वही उत्साह उस अंतिम दिन भी बना रहेगा जब हम अंततः मनुष्यों को अंतरिक्ष में भेजेंगे।”
शुक्ला ने यह भी माना कि इस तरह के नवीनतम तकनीकी मिशन में देरी और बाधाएं स्वाभाविक हैं, लेकिन इन्हें असफलता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “मैं इस तरह के महत्वाकांक्षी मिशन से जुड़ी जटिलताओं और चुनौतियों को भलीभांति समझता हूं। हां, इसमें कामयाब होने से पहले सफर में कुछ अनिश्चितताएं जरूर आएंगी।”
अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत-अमेरिका सहयोग पर चर्चा करते हुए, शुक्ला ने अपने ‘एक्सिओम’ मिशन का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग अंतरिक्ष अन्वेषण को आगे बढ़ा सकता है।
उन्होंने कहा, “मेरा ‘एक्सिओम’ मिशन अंतरिक्ष उड़ान और अन्वेषण में सहयोग का एक अच्छा उदाहरण था, और यह अन्य क्षेत्रों के लिए भी आदर्श है। संयुक्त प्रयास भविष्य की साझेदारियों के द्वार खोलते हैं और देशों को साझा लक्ष्यों की दिशा में मिलकर काम करने के लिए प्रेरित करते हैं।”
ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने इस बात पर बल दिया कि भारत के अभियानों को सरकार का मजबूत समर्थन प्राप्त है और विज्ञान व अंतरिक्ष अन्वेषण में निवेश लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समर्थन आने वाले वर्षों में भी जारी रहेगा।