स्कूलों पर 20 फरवरी तक शुल्क विनियमन समिति गठित करने के लिए दबाव न डालें: दिल्ली उच्च न्यायालय

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नयी दिल्ली, नौ फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने निजी विद्यालयों द्वारा स्कूल स्तरीय शुल्क विनियमन समिति (एसएलएफआरसी) गठित किये जाने के लिए दिल्ली सरकार द्वारा निर्धारित 10 फरवरी की समय सीमा को सोमवार को बढ़ाकर 20 फरवरी तक कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने 1 फरवरी को जारी अधिसूचना को चुनौती देने वाली कई विद्यालय संघों की याचिकाओं पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया।

इन संघों को 10 दिनों के भीतर समिति गठित करने का निर्देश दिया गया था। पीठ ने कहा कि समिति के गठन को टाले जाने से किसी तरह का पूर्वाग्रह नहीं होगा।

पीठ ने कहा, ‘‘हमारा मानना ​​है कि यदि दिल्ली सरकार शुल्क विनियमन समिति के गठन पर जोर नहीं देती है, तो इससे किसी भी पक्ष या समयसीमा (शैक्षणिक सत्र 2026-2027 के लिए शुल्क निर्धारण के लिए) पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।’’

अदालत ने कहा, ‘‘हम निर्देश देते हैं स्थगन याचिका की अगली सुनवाई तिथि यानी 20 फरवरी तक, जिन स्कूलों ने समिति का गठन नहीं किया हो, उन पर इसे गठित करने के लिए दबाव नहीं डाला जाए।’’

दिल्ली सरकार ने एक फरवरी को दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम के कार्यान्वयन को ‘‘सुचारू’’ बनाने के लिए एक राजपत्र अधिसूचना जारी की थी।

अधिसूचना के अनुसार, प्रत्येक विद्यालय को आदेश के प्रकाशन के 10 दिनों के भीतर एक स्कूल शुल्क समिति गठित करने का निर्देश दिया गया है।

राजपत्र अधिसूचना में कहा गया कि विद्यालय प्रबंधन को समिति के गठन के 14 दिनों के भीतर, 2026-27 से शुरू होने वाले अगले तीन शैक्षणिक वर्षों के लिए प्रस्तावित शुल्क संरचना का विवरण प्रस्तुत करना होगा। इसके बाद, समिति अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार शुल्क निर्धारित करने की प्रक्रिया शुरू करेगी।

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