केंद्र पर एसआईआर की आड़ में एनआरसी लागू करने का प्रयास उलटा पड़ेगा : तृणमूल सांसद सुष्मिता देव

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नयी दिल्ली, नौ फरवरी (भाषा) राज्यसभा में सोमवार को तृणमूल कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव ने केंद्र सरकार पर पश्चिम बंगाल के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए उसे आगाह किया कि वह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की आड़ में राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) लागू करने का जो प्रयास कर रही है, वह उस पर उलटा पड़ेगा।

उच्च सदन में बजट 2026-27 पर चर्चा में भाग लेते हुए सुष्मिता ने कहा कि केंद्र सरकार जिस तरह से कुछ राज्यों के साथ भेदभाव कर रही है, उससे भारत को विकसित देश बनाने में मदद नहीं मिलेगी।

तृणमूल सदस्य ने केंद्र सरकार को आगाह किया कि वह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की आड़ में राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) लागू करने का जो प्रयास कर रही है, वह खुद उस पर ही उलटा पड़ेगा। उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि पश्चिम बंगाल एवं असम से कितने घुसपैठिए पकड़े गये, इसके आंकड़े उसे बताना चाहिए

उन्होंने कहा कि सरकार पिछले कई साल से जनगणना कराये बिना बजट कैसे ला रही है। उन्होंने कहा कि जनगणना के बिना लोगों से जुड़े वास्तविक आंकड़े कैसे पता चल पाएंगे। उन्होंने कहा कि नीति आयोग जिन विभिन्न आधार पर लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर मानता है, उनमें से एक आधार व्यक्ति के पास जनधन खाता होना है जबकि देश में 20 प्रतिशत से अधिक जनधन खाते निष्क्रिय पड़े हुए हैं।

तृणमूल सदस्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार युवा शक्ति की बात करती है किंतु वित्त मंत्री को बताना चाहिए कि इस सरकार के सत्ता में आने के बाद कितने युवाओं को नौकरी दी गयी। उन्होंने दावा कि पश्चिम बंगाल में बेरोजगारी में 40 प्रतिशत की कमी आयी है।

उन्होंने दावा किया कि देश में जहां असमानता बढ़ी है वहीं रूपये की कीमत घटती जा रही है।

सुष्मिता ने कहा कि केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के दो लाख करोड़ रूपये रोक रखे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना सहित विभिन्न योजनाओं की धनराशि केंद्र ने रोक रखी है।

उन्होंने कहा कि असम में डबल इंजन की सरकार हैं किंतु वहां की राज्य सरकार को इतनी बड़ी मात्रा में उधार क्यों लेना पड़ा।

द्रमुक के पी विल्सन ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि केंद्र द्वारा इस बजट को विकसित भारत का बजट बताया जाना सच्चाई से कोसों से दूर है। उन्होंने कहा कि सरकार ब्याज के रूप में जो धनराशि चुका रही है, वह उसके कुल व्यय का एक चौथाई है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने जीडीपी के अनुपात में ऋण कम करने का जो लक्ष्य रखा है, उसे प्राप्त करने में दशकों लग जाएंगे।

उन्होंने भारत एवं अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका ने शुल्क (टैरिफ) को हथियार बनाकर भारत सरकार को झुकने के लिए मजबूर कर दिया।

द्रमुक सदस्य ने सरकार से पूछा कि उसने इस एकतरफा समझौते को क्यों स्वीकार किया जबकि इससे देश के किसानों और निर्माताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि बजट में तमिलनाडु के लिए कोई भी नयी परियोजना की घोषणा नहीं की गयी है। उन्होंने कहा कि यदि उनके राज्य के लिए कुछ भी किया जाता है तो उसका लाभ भारत को ही मिलेगा।

विल्सन के अपनी बात पूरी कर लेने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आसन की अनुमति से संक्षिप्त हस्तक्षेप करते हुए कहा कि द्रमुक सदस्य का यह दावा बिलकुल गलत है कि बजट में तमिलनाडु को कुछ नहीं दिया गया।

सीतारमण ने कहा कि दुर्लभ खनिज गलियारा योजना, प्रत्येक जिले में लड़कियों के लिए हॉस्टल, मछुआरों के लिए घोषित योजनाएं, नारियल से संबंधित घोषणाएं ऐसी हैं जिनसे क्या तमिलनाडु के लोगों, लड़कियों, किसानों तथा अन्य वर्ग के लोगों को लाभ नहीं मिलेगा ? उन्होंने कहा कि इस प्रकार का दावा करना उचित नहीं है।

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