पटना, नौ फरवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी राष्ट्र को पहले, संगठन को दूसरे और स्वयं को सबसे अंत में रखती है, जबकि विपक्ष के लिए “स्वार्थ ही पहला और आखिरी” होता है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार ग्रहण करने के बाद अपने गृहनगर पटना की पहली यात्रा पर पहुंचे नवीन ने पार्टी की बिहार इकाई द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने उस दौर में “जंगल राज” को उखाड़ फेंकने में भूमिका निभाई, जब पर्चे बांटना भी जोखिम से भरा होता था।
उन्होंने कहा, “त्याग की वही भावना आज भी जारी है। मुझे केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में जाने का अवसर मिला, जहां पार्टी कार्यकर्ता बिना किसी स्वार्थ के संघर्ष कर रहे हैं। भाजपा ऐसी पार्टी है जो राष्ट्र को पहले, पार्टी को दूसरे और स्वयं को सबसे अंत में रखती है। हमारे विरोधियों के लिए स्वार्थ ही पहला और आखिरी होता है।”
पैंतालीस वर्ष की उम्र में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नवीन ने कार्यकर्ताओं को आश्वस्त करते हुए कहा, “हमारे पास मजबूत वॉच टॉवर है। बूथ स्तर का कार्यकर्ता निश्चिंत रह सकता है कि उसके काम का संज्ञान लिया जा रहा है और वह प्रदेश इकाई का अध्यक्ष, यहां तक कि राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बन सकता है। मैं आपके सामने इसका उदाहरण हूं।”
उन्होंने युवा कार्यकर्ताओं से कहा कि यदि कभी चीजें उनकी इच्छा के अनुसार न हों तो निराश न हों। उन्होंने कहा, “वे बेहतर दिनों की उम्मीद रख सकते हैं। पार्टी ने अब तक क्षैतिज विस्तार देखा है। आने वाले दिनों में कार्यकर्ताओं का ऊर्ध्वाधर विकास होगा।”
बांकीपुर के विधायक नवीन ने अपने गृह राज्य बिहार में पार्टी की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए कहा, “अगर आप सब अच्छा प्रदर्शन करेंगे तो श्रेय मुझे मिलेगा। यदि आप असफल होंगे तो दोष मुझ पर आएगा। 2047 तक विकसित भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपने को साकार करने में यह राज्य अहम भूमिका निभाएगा।”
नवीन दिसंबर में कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने तक बिहार सरकार में मंत्री थे।
उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी देश के 140 करोड़ लोगों को “समाधान” के रूप में देखते हैं, जबकि “कांग्रेस के एक प्रधानमंत्री” के लिए 40 करोड़ भारतीय “चुनौती” थे।
उन्होंने कहा, “आप सबने हाल में संसद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भाषण सुना होगा। उसमें यह बात सामने आई कि जहां कांग्रेस के एक प्रधानमंत्री के ने 40 करोड़ भारतीयों को चुनौती माना था, वहीं मोदी 140 करोड़ देशवासियों को समाधान के रूप में देखते हैं।”