मुंबई, 10 फरवरी (भाषा) नकदी के मामले में मजबूत स्थिति वाले बैंक ट्राई-पार्टी रेपो (ट्रेप) बाजार में कम दर पर कोष जुटा रहे हैं और ज्यादा रिटर्न के लिए स्थायी जमा सुविधा (एसडीएफ) के तहत भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पास पैसा लगा रहे हैं। डीलरों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक की एसडीएफ दर और ट्रेप दर के बीच के अंतर से बने ‘आर्बिट्रेज’ के अवसर से 0.70 प्रतिशत तक की कमाई हो रही है।
ट्रेप एक गारंटी जमा कर धन मुहैया कराने वाला बाजार खंड है, जहां बैंक और म्यूचुअल फंड कर्ज देने एवं लेने का काम करते हैं। खासकर म्यूचुअल फंड कंपनियां कर्ज देने के मामले में अधिक सक्रिय रहती हैं।
ट्रेप बाजार में दरें नकदी की स्थिति, मांग, नियामकीय जरूरतों और कुल बाजार धारणा से प्रभावित होती हैं। दूसरी ओर, एसडीएफ दरें निश्चित रहती हैं और इनमें बदलाव तभी होता है जबकि केंद्रीय बैंक रेपो दर में कटौती या बढ़ोतरी करता है।
रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, ट्रेप और एसडीएफ दरों के बीच का अंतर हाल के दिनों में लगातार बढ़ा है। यह 30 जनवरी के 0.33 प्रतिशत से बढ़कर दो फरवरी को 0.43 प्रतिशत, तीन फरवरी को 0.60 प्रतिशत और चार फरवरी को 0.76 प्रतिशत तक पहुंच गया। पांच फरवरी को यह अंतर 0.70 प्रतिशत था हालांकि छह फरवरी को यह घटकर 0.40 प्रतिशत रह गया और सोमवार को फिर से बढ़कर 0.63 प्रतिशत हो गया।
बाजार भागीदारों ने कहा कि दोनों दरों के बीच बढ़ते अंतर ने लघु अवधि में इस रणनीति को आकर्षक बना दिया है, खासकर उन बैंकों के लिए जिनके पास बहुत ज्यादा नकदी है।