सौंदर्य के शत्रु हैं कृत्रिम सौंदर्य प्रसाधन

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यह एक कटु सत्य है कि कोई भी सौंदर्य प्रसाधन आपकी त्वचा का रंग बदल नहीं सकता। त्वचा के रंग के लिये त्वचा में उपस्थित मैलानिन नामक पिगमेंट जिम्मेवार होता है जिसकी मात्रा को किसी भी तरह कम या ज्यादा नहीं किया जा सकता, अतःयदि कोई क्रीम आपको स्थायी रूप से गोरा करने का दावा करती है तो सरासर धोखा ही है।
लिपस्टिक और नेलपालिश दोनों ही खाद्य पदार्थों के माध्यम से आपके पेट में पहुंचती हैं। लिपस्टिक न सिर्फ लगाने वाले के ही पेट में पहुंचती है बल्कि पति या प्रेमी के भी, जो लिपस्टिक लगाने वाली महिला के अधरों का रसपान करने के साथ-साथ आधी लिपस्टिक भी उदरस्थ कर जाते हैं। नेलपालिश तो आटा गूंधते, सब्जी काटते या इसी तरह के अन्य काम करते समय बन रहे भोजन में पहुंचकर सारे परिवार को हानि पहुंचाती है।
विभिन्न शैंपू, कंडीशनर व हेयर डाई आदि न सिर्फ गंजेपन की रफ्तार को बढ़ा रहे हैं बल्कि इनके अधिक उपयोग से कैंसर का खतरा भी निरंतर बढ़ रहा है। आई ब्रो पैंसिल और मस्कारा जैसी सौंदर्य सामग्रियों में ग्रेफाइट एवं लैड जैसे घातक पदार्थ होते हैं। इसी प्रकार टैलकम पाउडर व रूज आदि भी हमारे रोमछिद्र बंद कर त्वचा के श्वसन को कम कर देते हैं जिससे त्वचा कई रोगों की शिकार हो जाती है।
इस प्रकार ये कृत्रिम सौंदर्य प्रसाधन न सिर्फ हमारा पैसा और समय बरबाद करते हैं, हमारे स्वास्थ्य के साथ घिनौना मजाक करते हैं बल्कि लाखों पशु-पक्षियों की नृशंस हत्या का पाप भी हमारे सर मढ़ते हैं क्योंकि अनेक सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण में इन पशु पक्षियों का रक्त, चर्बी और शरीर के अन्य कई अंगों का उपयोग किया जाता है।
सुंदर दिखने की चाह बुरी नहीं है। आप अपने सौंदर्य को निखारने के लिये घरेलू चीजों का इस्तेमाल करें। दूध, मलाई, दही, बेसन, चोकर, शहद, गुलाबजल, राई दाना, हल्दी, आंवला, शिकाकाई, नींबू, खीरा, नीम, मुल्तानी मिट्टी और अंडे जैसे कितने ही घरेलू सौंदर्य प्रसाधन आपके आसपास ही तो उपलब्ध हैं और वो भी कितने सस्ते दामों में। 

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