उप्र की ‘बिस्मिल’ गन्ने की किस्म को चार अन्य राज्यों में खेती के लिए मिली मंजूरी

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बरेली (उप्र), आठ जनवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद ने स्वतंत्रता सेनानी राम प्रसाद बिस्मिल के नाम पर ‘बिस्मिल’ नामक गन्ने की एक नई उच्च उपज वाली किस्म विकसित की है, जिसे अब चार अन्य राज्यों में खेती के लिए मंजूरी मिल गई है।

परिषद के निदेशक वी. के. शुक्ला ने बताया कि यह किस्म जिसे पहले केवल उत्तर प्रदेश के लिए मंजूरी मिली थी। केंद्रीय समिति की हरी झंडी के बाद अब इसे हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और राजस्थान में भी खेती के लिए भी मंजूरी मिल गई है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के तहत विकसित इस किस्म को आधिकारिक तौर पर सीओएसएचए 17231 (कोयंबटूर-शाहजहांपुर) नाम दिया गया है।

इस किस्म के ‘ब्रीडर’ डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि यह किस्म गन्ने की फसल के लिए एक बड़ा खतरा मानी जाने वाली लाल सड़न (रेड रॉट) से निपटने में सक्षम है। इसकी औसत पैदावार क्षमता 86.35 टन प्रति हेक्टेयर है जिसमें शर्करा प्राप्ति (गन्ने में पोल प्रतिशत) 13.97 प्रतिशत है।

वरिष्ठ वैज्ञानिक अजय तिवारी ने कहा कि यह नई किस्म किसानों की आय में काफी बढ़ोतरी करेगी और साथ ही चीनी उत्पादन को भी बढ़ाएगी।

अधिकारियों ने बताया कि इस किस्म का नाम क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल के सम्मान में ‘बिस्मिल’ रखा गया है जिन्होंने काकोरी कांड में अहम भूमिका निभाई थी। बिस्मिल को भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान के लिए पहचाना जाता है।

प्रसार अधिकारी संजीव पाठक ने कहा कि इस किस्म के बीज पहले ही उत्तर प्रदेश के सभी 42 गन्ना उगाने वाले जिलों में बांटे जा चुके हैं जिनके नतीजे काफी अच्छे रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ चार अतिरिक्त राज्यों के लिए मंजूरी संस्थान के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। ’’

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