वाशिंगटन से जो रिपोर्ट आई है उससे लगता है कि विदेशों ने भी हल्दी का लोहा मान लिया है। एरिजोना कॉलेज ऑफ मेडिसिन ने एक शोध में हल्दी पर काम करके इसके महत्व को जगजाहिर कर दिया है। इन शोधकर्ताओं ने कहा है कि आर्थराइट्ïस और ओस्टियोपोरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार में हल्दी की विशेष भूमिका है। अमेरिका में हल्दी पर खूब काम हो रहा है। इन शोधकर्ताओं ने हल्दी के पौधे की जड़ और उसके कई भिन्न-भिन्न तत्वों पर भी शोध किया है। इन डॉक्टरों में शोधकर्ता डॉक्टर फंक का नाम विशेष रूप से लिया जा रहा है। इसी टीम ने जानवरों पर हल्दी की जड़, तेल का प्रयोग किया। उन्होंने देखा कि जानवरों पर उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ा। इससे जानवरों की पाचन शक्ति में सुधार आ गया। शोधकर्ताओं ने इसके बाद इस बात का शोध किया कि कैसे हल्दी आर्थराइट्ïस को ठीक करने का कार्य करती है। शोधकर्ता कहते हैं कि जब जोड़ों में दर्द पैदा होता है तो एनएफकेबी नाम का तत्व ज्यादा सक्रिय होता है, लेकिन हल्दी का प्रयोग इस तत्व की सक्रियता को कम कर देता है। कुछ अन्य रोगों जैसे अस्थमा, स्केलोरियस पर भी हल्दी का प्रयोग काफी कारगर साबित हो सकता है। अनुसंधान टीम के मुखिया डॉ. फंक ने तो अब इतना तक कह दिया है- हल्दी स्वयं ही एक दवा है जो हड्ïिडयों को गलने से रोकने में सक्षम है। अत: इसका महत्व अत्यधिक है।