विश्व धर्म संसद में ईसाई मिशनरियों को खुलेआम ललकारा था स्वामी विवेकानंद ने

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 ‘अमेरिका निवासी मेरे प्यारे बहनों और भाइयों,Ó 11 सितंबर 1893 को, विश्व धर्म संसद में जैसे ही स्वामी जी ने इस उद्बोधन के साथ अपना भाषण प्रारंभ किया,शिकागो के आर्ट इंस्टिट्यूट में उपस्थित  विश्व के कोने-कोने से एकत्रित सभी धर्मों के 7000 प्रतिनिधि किसी अदृश्य शक्ति के आकर्षण से प्रेरित होकर स्वामी जी का सम्मान करने को खड़े हो गए। दो मिनट तक अनवरत तालियां बजती रही। शिकागो में 11 सितंबर 1893 से प्रारंभ होकर विश्व धर्म संसद 27 सितंबर 1893 तक लगातार 17 दिन चलती रही। इसमें से 6 दिन स्वामी जी ने अपना भाषण दिया। उनका महत्वपूर्ण भाषण 19 सितंबर और 20 सितंबर का रहा। यहाँ बहुत ही संक्षेप में उनके भाषण के कुछ अंश आपको बताते है –
 उन्नीस सितंबर को स्वामी जी ने अपना भाषण हिंदू धर्म पर दिया। स्वामी जी ने अपने भाषण में कहा- ‘ऐतिहासिक युग के पूर्व के केवल तीन ही धर्म आज संसार में विद्यमान है – हिंदू धर्म ,पारसी धर्म ,और यहूदी धर्म। ये तीन धर्म अनेकानेक प्रचंड आघातों के पश्चात भी लुप्त ना होकर आज भी जीवित है। यह उनकी आंतरिक शक्ति का प्रमाण है पर जहां हम यह देखते हैं कि यहूदी धर्म,ईसाई धर्म को नहीं पचा सका, वरन अपनी सर्व विजयी संतान ईसाई धर्म द्वारा अपने जन्म स्थान से निर्वासित कर दिया गया,और यह कि केवल मु_ीभर पारसी ही अपने महान धर्म की गाथा गाने के लिए अब अवशेष हैं। वहाँ भारत में एक के बाद एक अनेक धर्म पंथो का उद्भव हुआ और वे पंथ वेदप्रणीत धर्म को जड़ से हिलाते से प्रतीत हुए पर भयंकर भूकंप के समय समुद्री किनारों की जल तरंगों के समान यह धर्म कुछ समय के लिए इसलिए पीछे हट गया कि वह तत्पश्चात हजार गुना अधिक बलशाली होकर सबको डुबाने वाली बाढ़ के रूप में लौट आए ,और जब यह सारा कोलाहल शांत हो गया,तब सारे धर्म संप्रदाय अपनी जन्म दात्री मूल हिंदू धर्म की विराट काया द्वारा आत्मसात कर लिए गए,पचा लिए गए।Ó
बीस सितंबर को अपने भाषण में स्वामी जी ने ईसाई भारत के लिए क्या कर सकते हैं , पर बोलते हुए कहा – ‘आप लोग अपने धर्म उपदेशक अन्य देशों में भेजकर मूर्ति पूजकों को अपने धर्म में लाने के लिए तो बड़े उत्सुक हैं, पर जो लोग अन्न बिना मर रहे हैं , उन्हें बचाने के लिए आप कोई उपाय क्यों नहीं करते ? भारतवर्ष में जब भयानक अकाल पड़ा था तो सहस्रों और लाखों हिंदू भूख से पीड़ित होकर मर गए, पर आप सब ईसाइयों ने उनके लिए कुछ नहीं किया। आप लोग सारे हिंदुस्तान में गिरजे बनाते हैं, पर मैं कहूं पूर्वीय देश में धर्म का अभाव नहीं है , उनके यहां तो वैसे ही आवश्यकता से अधिक धर्म हैं। वहाँ अभाव है रोटी का ,अन्न का। हिंदुस्तान के लाखों भूखे लोग सूखे गले से अन्न अन्न, रोटी रोटी, चिल्ला रहे हैं। वे  तो हमसे अन्न मांगते हैं , और हम उन्हें देते हैं पत्थर। भूखों को धर्म का उपदेश देना उनका अनादर और तिरस्कार करना है।Ó
स्वामी विवेकानंद का कहना था ‘दुनिया क्या कहेगी ऐसा सोचना ही कमजोरी है , तुम्हें खुद जो अच्छा जान पड़ता है , वही करो ,जीवन का रहस्य यही है।Ó उन्होंने आगे कहा- ‘पुराने धर्म में नास्तिक उसे कहते थे जो ईश्वर में विश्वास नहीं करता था परंतु नया धर्म उसे नास्तिक कहता है जिसे स्वयं में विश्वास नहींÓ
इस प्रकार  स्वामी विवेकानंद ने विश्व धर्म सम्मेलन में भूखे लोगों को लालच देकर धर्म परिवर्तन करवाने वाली ईसाई मिशनरियो को खुले आम दुत्कारने का साहस शिकागो में सात हजार विश्व प्रतिनिधियों के सामने किया। भारतीय संस्कृति का और धर्म का महत्व बताकर साबित किया कि भारत क्यों विश्व गुरु है। अगर आज के समय में स्वामी विवेकानंद ने ऐसा बोला होता तो हमारे देश में ही हजारों लोग उनके विरोध में खड़े हो गए होते। हमारी सरकार और कानून धर्म परिवर्तन के इस षड्यंत्र को रोकने में नाकाम रहा है। स्वामी विवेकानंद कहते थे,’ उठो जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत।Ó  
स्वामी विवेकानंद से प्रेरित होकर सन 1925 में डॉक्टर केशवराम बलिराम हेडगवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की। इस वर्ष 100 वर्ष पूरे होने पर राष्ट्रीीय स्वयंसेवक संघ देश के नागरिकों में राष्ट्र प्रेम की भावना और उनका समाज के प्रति दायित्व का भाव जगा रहा है । जिसके लिए देश के युवाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाने का कार्यक्रम योग के माध्यम से निरंतर किया जा रहा है।
स्वामी जी की तर्ज़ पर ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक माननीय मोहन भागवत ने भी कहा है कि मुस्लिमों को भारत में डरने की कोई जरूरत नहीं है। हां परंतु अन्य धर्मों को अपनी ही श्रेष्ठता की मानसिकता छोडऩी होगी। हिंदू समाज 1000 वर्षों से अधिक समय तक प्रताड़ित और युद्ध ग्रस्त रहा। विदेशी आक्रांता ने तमाम षड्यंत्र के द्वारा यहां के हिंदुओं का धर्म परिवर्तन किया। यहां के मंदिरों को उजाड़ा यह सब ऐतिहासिक तथ्य हैं। ऐसे में आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  ही एकमात्र संगठन है, जो अपनी शिक्षाओं के माध्यम से देश में हिंदू समाज में जागृति ला सकता है, स्वामी विवेकानंद के सपनों को पूरा कर सकता है, और भारत को विश्व गुरु स्थापित कर सकता है। 

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