बैंक धोखाधड़ी: उच्चतम न्यायालय ने ईडी मामले में एमटेक ग्रुप के पूर्व चेयरपर्सन को दी जमानत

0
PTI12_16_2025_000065A

नयी दिल्ली, छह जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने 27,000 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी से जुड़े धन शोधन के मामले में एमटेक ग्रुप के पूर्व चेयरपर्सन अरविंद धाम को मंगलवार को जमानत दे दी।

न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें धाम को जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।

न्यायमूर्ति आराधे ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अदालत ने इस मामले में धाम की अपील स्वीकार कर ली है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने पिछले साल 19 अगस्त को धाम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि समय से पहले रिहाई जवाबदेही सुनिश्चित करने के प्रयासों को कमजोर कर सकती है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में एमटेक ऑटो लिमिटेड, एआरजी लिमिटेड, एसीआईएल लिमिटेड, मेटलिस्ट फोर्जिंग लिमिटेड, कास्टेक्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड और एमटेक ग्रुप के प्रवर्तक अरविंद धाम के अलावा कुछ अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की है।

इससे पहले, ईडी ने दिवालिया हो चुकी, मोटर वाहन कलपुर्जे बनाने वाली कंपनी एमटेक ग्रुप की कंपनियों की 550 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों को धन शोधन रोधी कानून के तहत अस्थायी रूप से जब्त कर लिया था।

सितंबर 2024 में एजेंसी द्वारा 5,115.31 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गईं।

उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर 27 फरवरी 2024 को धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ईडी ने जांच शुरू की।

एजेंसी ने धाम को जुलाई 2024 में गिरफ्तार किया और सितंबर 2024 में उनके खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था।

जांच में पाया गया कि इन कंपनियों को, समूह की अन्य कंपनियों के साथ दिवालियापन की प्रक्रिया से गुजारा गया जिसके समाधान के कारण बैंकों को 80 प्रतिशत से अधिक का नुकसान हुआ। इससे इन सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों को काफी नुकसान हुआ।

ईडी के अनुसार, एमटेक की सभी संपत्तियों को ‘‘अपराध की प्रत्यक्ष आय’’ के रूप में पहचाना गया है और ये संपत्तियां धाम के स्वामित्व वाली कई कंपनियों के माध्यम से ली गई थीं। साथ ही एमटेक कंपनियों की संपत्तियां उन बैंकर के पास हैं जिन्होंने ऋण स्वीकृत किए थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *