वर्तमान में चीनी का प्रचलन अत्यधिक बढ़ गया है। प्राचीनकाल से हाल के वर्षों तक ताल गुड़, ताल मिश्री, गन्ने का गुड़, भूरा, भूरा शक्कर, श्वेत शक्कर (सफेदा) का प्रचलन था जो स्वास्थ्यकर था, परंतु इनके स्थान पर सफेद चीनी का प्रयोग होने लगा है। जो एक विष (जहर) ही है और अनेकों रोगों का कारण है। जानिए कैसे:- 1. चीनी बनाने की प्रक्रिया में गंधक का सबसे अधिक प्रयोग होता है। गंधक यानी ‘पटाखोंÓ का मसाला। 2. गंधक अत्यंत कठोर धातु है जो शरीर में चला तो जाता है परंतु बाहर नहीं निकलता। 3. चीनी कॉलेस्ट्राल बढ़ाती है जिसके कारण हृदयाघात यानि हार्टअटैक आता है। 4. चीनी शरीर के वजन को अनियंत्रित कर देती है। जिसके कारण मोटापा होता है। 5. चीनी रक्तचाप यानी ब्लड प्रेशर को बढ़ाती है। 6. चीनी की मिठास को आधुनिक चिकित्सा में सुक्रोज कहते हैं। जो मानव और पशु दोनों ही पचा नहीं पाते। 7. चीनी बनाने की प्रक्रिया में तेइस हानिकारक रसायनों का प्रयोग किया जाता है। 8. चीनी को साफ व श्वेत करने के लिए पशुओं की हड्डियों का इस्तेमाल किया जाता है। 9. चीनी डाइबिटीज (मधुमेह)का एक प्रमुख कारण है। 10. चीनी पेट की जलन का एक प्रमुख कारण है। 11. चीनी शरीर में ट्राइग्लिसाइड को बढ़ाती है। 12. चीनी पैरेलिसिस अटैक या लकवा होने का एक प्रमुख कारण है। 13. चीनी बनाने की सबसे पहली मिल (फैक्ट्री) ब्रिटिशों ने सन् 1868 ई. में लगाई थी। उसके पहले भारतवासी शुद्ध देशी गुड़ (चक्की गुड़, ढेलीगुड़, भूरा शक्कर, रवा गुड़, श्वेत शक्कर) खाते थे और कभी बीमार नहीं पड़ते थे। गुड़ हड्डियों को मजबूत करता है जबकि चीनी गलाती है कमजोर करती है।