नयी दिल्ली, 14 जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को दिल्ली सरकार से कहा कि वह दिल्ली स्कूल अधिकरण को “मजबूत” बनाए और उसके आदेशों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए तीन महीने में नियम बनाए।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि 2010 में उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ द्वारा इस संबंध में नियम बनाने का सुझाव दिया था लेकिन इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने अब तक ऐसा नहीं किया।
अदालत ने यह भी कहा कि फिलहाल दिल्ली स्कूल अधिकरण के आदेशों के क्रियान्वयन के लिए कोई कानूनी प्रावधान नहीं है और यह स्थिति जारी नहीं रहनी चाहिए।
अदालत ने कहा, “आपको अधिकरण को मजबूत बनाना होगा। अधिकरण को अधिकार देने में क्या परेशानी है?”
अदालत ने यह भी कहा, “हम आशा करते हैं कार्यान्वयन तंत्र की आवश्यकता पर संबंधित अधिकारी विचार करेंगे और इसके लिए उचित कदम उठाएंगे। हम आशा करते हैं कि आज से तीन महीने के अंदर जितनी जल्दी हो सके, प्राथमिकता के आधार पर उचित निर्णय और कार्रवाई की जाएगी।”
गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) “जस्टिस फॉर ऑल” ने इस मामले के संबंध में याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ता ने कहा कि मौजूदा कानून व्यवस्था के तहत किसी भी निजी स्कूल के पीड़ित कर्मचारी को अधिकरण का आदेश लागू कराने के लिए कार्रवाई शुरू करने की अनुमति नहीं है।