प्रीमियर एनर्जीज की 11,000 करोड़ रुपये के निवेश से सेल, मॉड्यूल क्षमता बढ़ाने की योजना

0
xsdwqsw

नयी दिल्ली, 12 जनवरी (भाषा) नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की कंपनी प्रीमियर एनर्जीज घरेलू मांग को पूरा करने के लिए अपनी 11,000 करोड़ रुपये की विस्तार योजना के तहत अपनी वार्षिक सेल एवं मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता को क्रमशः 10.6 गीगावाट और 11.1 गीगावाट तक दोगुना से अधिक करने की योजना बना रही है।

प्रीमियर एनर्जीज के मुख्य व्यापार अधिकारी (सीबीओ) विनय रुस्तगी ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ बातचीत में कहा कि कंपनी वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े एकीकृत नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण विनिर्माताओं में से एक बनने के लिए इन्गॉट एवं वेफर के विनिर्माण में भी प्रवेश करने की योजना बना रही है।

उन्होंने बताया कि कंपनी वर्तमान में तेलंगाना के हैदराबाद के पास स्थित चार इकाइयों से प्रतिवर्ष 3.2 गीगावाट (जीडब्ल्यू) सेल और 5.1 गीगावाट मॉड्यूल का उत्पादन करती है।

कंपनी की उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर किए गए एक सवाल पर उन्होंने सकारात्मक जवाब दिया।

विनय रुस्तगी ने कहा, ‘‘ बिल्कुल, हमारे पास 11,000 करोड़ रुपये की एक बड़ी विस्तार योजना है। हम आंध्र प्रदेश में 7.4 गीगावाट सेल और तेलंगाना में छह गीगावाट मॉड्यूल क्षमता जोड़ेंगे।’’

वित्तपोषण के स्रोतों का विवरण देते हुए रुस्तगी ने बताया कि कंपनी ने पिछले साल अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के जरिये 1,300 करोड़ रुपये जुटाए थे। इसके अलावा, सार्वजनिक क्षेत्र की भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (इरेडा) से ऋण के माध्यम से 2,200 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त की गई है और शेष राशि आंतरिक स्रोतों से जुटाई जाएगी।

सीबीओ ने कहा, ‘‘ यह (विस्तार योजना) बढ़ती मांग पर आधारित है। भारत और विदेशों में हमारे मॉड्यूल की मांग बढ़ रही है। केवल घरेलू बाजार में ही हमारे पास 13,000 करोड़ रुपये के ‘ऑर्डर’ हैं। अगले एक साल के लिए हमारी बुकिंग पूरी हो चुकी है।’’

उन्होंने कहा कि इसके अलावा कंपनी अतीत में अमेरिकी बाजार में भी सेल का निर्यात करती रही है।

‘बैकवर्ड इंटीग्रेशन’ से संबंधित सवालों पर रुस्तगी ने कहा कि कंपनी चीन के बाहर सबसे बड़े एकीकृत नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण विनिर्माताओं में से एक बनने के लिए इन्गॉट और वेफर के क्षेत्र में भी प्रवेश करने की कोशिश कर रही है।

एक सौर पैनल, मॉड्यूल से बना होता है जिसमें सेल शामिल होते हैं। सेल विनिर्माण के लिए इन्गॉट की आवश्यकता होती है जिसके लिए वेफर की आवश्यकता होती है।

उन्होंने कहा कि इन्गॉट एवं वेफर से संबंधित निवेश कंपनी के संचालन को अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए किया गया है और यह भारत को सौर विनिर्माण में आत्मनिर्भर बनाने के सरकार के इरादे के अनुरूप है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *