लोग इस भरोसे के साथ वोट देते हैं कि निर्वाचित प्रतिनिधि उनकी समस्याएं हल करेंगे: ओम बिरला

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लखनऊ, 21 जनवरी (भाषा) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को कहा कि लोग चुनाव में इस उम्मीद के साथ मतदान करते हैं कि उनके चुने हुए प्रतिनिधि उनकी समस्याओं, मुश्किलों और चुनौतियों को विधायिका तक ले जाएंगे तथा उन्हें हल करने की दिशा में काम करेंगे।

बिरला ने यहां 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन और विधायी निकायों के सचिवों के 62वें सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि विधायिका वह मंच है जिसके माध्यम से आखिरी व्यक्ति की आवाज़ सरकार तक पहुंचती है।

उनका कहना था, ‘‘जब कोई नागरिक अपना वोट डालता है, तो वह इस विश्वास के साथ ऐसा करता है कि अगले पांच वर्षों तक उसका चुना हुआ प्रतिनिधि उसके मुद्दों को सदन के सामने रखेगा और समाधान निकलेंगे।”

न्यायपालिका का उदाहरण देते हुए बिरला ने कहा कि जिस तरह लोग अदालतों पर निष्पक्ष सुनवाई का भरोसा करते हैं, उसी तरह वे विधायिका से भी सकारात्मक सोच और रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ काम करने की उम्मीद करते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर प्रतिनिधि सकारात्मक इरादे से मुद्दे उठाते हैं और सार्थक बहस के माध्यम से दिशा देते हैं, तो निश्चित रूप से विधायिकाओं के माध्यम से परिणाम सामने आएंगे।’’

बिरला ने इस बात पर जोर दिया कि पीठासीन अधिकारियों और सचिवों के सम्मेलन लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत करने और उन्हें सार्वजनिक अपेक्षाओं के प्रति अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और जिम्मेदार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने विधायी बैठकों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि सदनों की कार्यवाही की घटती अवधि पर बार-बार चिंता जताई गई है।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाने चाहिए कि राज्य विधायिकाएं सालाना कम से कम 30 दिन बैठें और सकारात्मक, मुद्दे-आधारित चर्चाओं में शामिल हों।

अध्यक्ष ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक संस्थानों को लोगों के करीब लाने और उनके कामकाज को विकसित भारत के निर्माण के लक्ष्य के साथ जोड़ने के लिए निरंतर संवाद, नवाचार और सुधारों की आवश्यकता है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना भी इस कार्यक्रम में मौजूद थे।

बिरला ने लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश द्वारा की गई पहलों की प्रशंसा की।

उन्होंने कहा कि विधायिकाओं के भीतर निरंतर चर्चा और संवाद राज्यों को विकास और सुशासन की दिशा में लगातार आगे बढ़ने में मदद करेगा।

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