असम के लोगों को वोट बैंक की राजनीति और विकास के बीच चयन करना होगा: हिमंत

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डिब्रूगढ़, 26 जनवरी (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने सोमवार को कहा कि लोगों के लिए सोचने और यह चयन करने का समय आ गया है कि वे ‘‘वोट बैंक की राजनीति’’ चाहते हैं या उनकी सरकार द्वारा पिछले पांच वर्ष में शुरू की गई विकास यात्रा को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

मुख्यमंत्री ने यहां गणतंत्र दिवस समारोह में अपने संबोधन में कहा कि अगले कुछ महीनों में राज्य में चुनाव होंगे और लोगों को यह तय करना होगा कि वे ‘‘बांग्लादेशी मुसलमानों के सामने आत्मसमर्पण’’ करना चाहते हैं या प्रगति और विकास का हिस्सा बनना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि पहले राज्य में गणतंत्र दिवस एवं स्वतंत्रता दिवस पर हिंसा और उग्रवादी घटनाएं होती थीं लेकिन अब ‘‘हम देश में सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाले राज्यों में हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमने उन बांग्लादेशी मुसलमानों के सामने आत्मसमर्पण न करने का फैसला किया है जिन्होंने विशाल क्षेत्रों पर अतिक्रमण कर लिया है और हमारी पहचान, संस्कृति तथा परंपराओं के लिए खतरा पैदा किया है। हमने अतिक्रमणकारियों को हटाकर अपनी जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की है।’’

शर्मा ने कहा कि भविष्य की पीढ़ी के अधिकारों की रक्षा करने के लिए उनकी सरकार लोगों की ‘माटी’ (जमीन), ‘भेटी’ (नींव), ‘संस्कृति’ और ‘परिचय’ की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अपनी पहचान को खतरे में न पड़ने देकर और इस सरकार द्वारा शुरू की गई विकास यात्रा को आगे बढ़ाएं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने लोगों से कहा, ‘‘असम को देश का अग्रणी राज्य’’ बनाने के लक्ष्य की ओर बढ़ाने के अपने प्रयास में ‘अटल’, ‘अविचल’ और ‘अग्रगामी’ बने रहें।