मुंबई, 23 जनवरी (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एल्गार परिषद माओवादी संबंध के मामले में आरोपी कार्यकर्ताओं सागर गोरखे और रमेश गाइचोर को इस आधार पर जमानत दे दी कि अन्य आरोपियों को भी इसी तरह की राहत दी गई है।
गोरखे और गाइचोर को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था और वे वर्तमान में तालोजा जेल में बंद हैं। इन दोनों पर प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) समूह के सक्रिय सदस्य होने का आरोप है।
न्यायमूर्ति ए एस गडकरी की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने इस बात पर गौर किया कि इस मामले में कई अन्य आरोपियों को लंबी कैद और निकट भविष्य में मामले की सुनवाई शुरू नहीं होने की संभावना के आधार पर जमानत दे दी गई है।
पीठ ने कहा, ‘‘इसलिए समानता के आधार पर दोनों अपीलकर्ताओं (गोरखे और गाइचोर) को भी जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए।’’
दोनों को एक-एक लाख रुपये की जमानत राशि जमा करने और महीने में एक बार राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
पुणे में 31 दिसंबर, 2017 को आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप में प्रमुख वकीलों, कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों सहित कम से कम 16 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
पुलिस के अनुसार, इन कथित भड़काऊ भाषणों के कारण अगले दिन पुणे शहर के बाहरी इलाके कोरेगांव-भीमा में हिंसा भड़क गई थी।
शुरू में इस मामले की जांच करने वाली पुणे पुलिस ने दावा किया कि माओवादियों ने सम्मेलन का समर्थन किया था। बाद में एनआईए ने मामले की जांच अपने हाथ में ले ली।
सुरेंद्र गाडलिंग को छोड़कर बाकी सभी आरोपियों को इस मामले में जमानत मिल चुकी है।
मुकदमे की प्रतीक्षा कर रहे पादरी और आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी (84) की जुलाई 2021 में हिरासत में रहते हुए मृत्यु हो गई थी।
मामले के अन्य आरोपियों में वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, आनंद तेलतुंबडे, वर्नोन गोंजाल्विस, अरुण फरेरा, शोमा सेन, गौतम नवलखा, सुधीर धवले, रोना विल्सन, ज्योति जगताओ और महेश राउत शामिल हैं।