केरल ने के-टीईटी के कार्यान्वयन के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की : मंत्री शिवनकुट्टी

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तिरुवनंतपुरम, चार जनवरी (भाषा) केरल सरकार ने उच्चतम न्यायालय में एक पुनर्विचार याचिका दायर कर उस फैसले को चुनौती दी है जिसके तहत शिक्षकों की नियुक्ति और पदोन्नति के लिए केरल शिक्षक पात्रता परीक्षा (के-टीईटी) अनिवार्य कर दी गई है। राज्य के सामान्य शिक्षा एवं श्रम मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने शनिवार को यह जानकारी दी।

मंत्री ने एक बयान में कहा कि याचिका में राज्य के शिक्षा क्षेत्र की अनूठी विशेषताओं और शिक्षकों के समक्ष पेश आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का हवाला देते हुए फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध किया गया है।

उन्होंने कहा कि यदि यह फैसला लागू होता है, तो इससे राज्य में लगभग 50,000 शिक्षकों की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं, और यह भी कहा कि वर्षों से सेवा कर रहे शिक्षकों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने बताया कि के-टीईटी की शुरुआत से पहले भी केरल ने साक्षरता और शैक्षिक मानकों में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया था, इसलिए यह दावा कि पात्रता परीक्षा के बिना शिक्षक अयोग्य हैं, राज्य के संदर्भ में सही नहीं है।

शिवनकुट्टी ने बताया कि 2012 में के-टीईटी की शुरुआत से पहले सेवा में शामिल हुए शिक्षकों को यह योग्यता हासिल करने का अवसर नहीं मिला।

उन्होंने कहा, इसलिए सरकार ने अनुरोध किया है कि 31 मार्च, 2012 से पहले सेवा में आए शिक्षकों को के-टीईटी की आवश्यकता से छूट दी जाए और उन्हें सेवानिवृत्ति तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी जाए।

पुनर्विचार याचिका में नेट, एसईटी और पीएचडी जैसी उच्च योग्यता रखने वाले शिक्षकों के लिए के-टीईटी से स्थायी छूट का भी अनुरोध किया गया है, और यह आग्रह किया गया है कि यह परीक्षा पहले से ही सेवा में कार्यरत शिक्षकों की पदोन्नति में बाधा नहीं बननी चाहिए।

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