रांची, आठ जनवरी (भाषा) झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस माह स्विट्ज़रलैंड के दावोस में होने वाली विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक में पहली बार शामिल होंगे और इसके बाद वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करने के लिए वह ब्रिटेन की भी यात्रा करेंगे। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी ने बताया कि दावोस में 18 से 24 जनवरी तक आयोजित डब्ल्यूईएफ बैठक में हिस्सा लेने के बाद सोरेन ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के ब्लावातनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में विशेष व्याख्यान देंगे और प्रश्नोत्तर सत्र में भाग लेंगे।
अधिकारी ने कहा, “सोरेने इस प्रतिष्ठित सार्वजनिक नीति संस्थान को संबोधित करने वाले भारत के पहले मुख्यमंत्री होंगे।”
यह यात्रा झारखंड राज्य के गठन के 25 वर्ष पूरे होने के साथ हो रही है और राज्य की डब्ल्यूईएफ में यह पहली आधिकारिक भागीदारी होगी।
अधिकारी के अनुसार, इससे झारखंड की वैश्विक मंचों पर उपस्थिति मजबूत करने और दीर्घकालिक वृद्धि यात्रा के अगले चरण की दिशा तय करने का संकेत मिलता है।
डब्ल्यूईएफ में झारखंड की भागीदारी ‘प्रकृति के साथ सामंजस्य में वृद्धि’ विषय पर आधारित होगी, जो मंच के इस साल के टिकाऊ वृद्धि, जुझारूपन और दीर्घकालिक आर्थिक बदलाव पर फोकस से मेल खाती है।
अधिकारी ने कहा कि सोरेन की अगुवाई में दावोस जाने वाला प्रतिनिधिमंडल निवेश प्रोत्साहन, जिम्मेदार संसाधन प्रबंधन, टिकाऊ औद्योगिक विकास, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा बदलाव और दीर्घावधि क्षेत्रीय वृद्धि जैसे विषयों पर संवाद करेगा।
डब्ल्यूईएफ की सालाना बैठक में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, शिवराज सिंह चौहान और प्रल्हाद जोशी के अलावा कई राज्यों के मुख्यमंत्री और 100 से अधिक भारतीय कंपनियों के शीर्ष अधिकारी भी भाग लेंगे।
बैठक में शामिल होने वाले मुख्यमंत्रियों में सोरेन के अलावा महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस, आंध्र प्रदेश के एन चंद्रबाबू नायडू, असम के हिमंत विश्व शर्मा, मध्य प्रदेश के मोहन यादव और तेलंगाना के ए. रेवंत रेड्डी शामिल हैं।
दावोस के बाद सोरेन के नेतृत्व में झारखंड का प्रतिनिधिमंडल ब्रिटेन के लंदन और ऑक्सफोर्ड सहित विभिन्न शहरों का दौरा करेगा। इस दौरान निवेश, नीति सहयोग, शैक्षणिक साझेदारी, कौशल विकास और प्रवासी भारतीयों के साथ संवाद पर ध्यान दिया जाएगा।
अधिकारी ने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य झारखंड की वैश्विक मंचों पर दृश्यता बढ़ाना, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को गहरा करना और राज्य में रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास तथा टिकाऊ आर्थिक वृद्धि को समर्थन देना है।