भू-राजनीतिक तनाव के बीच अहमदाबाद में होगी मोदी–मर्ज की अहम वार्ता

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नयी दिल्ली, 11 जनवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बीच सोमवार को होने वाली वार्ता में व्यापार, निवेश, अहम प्रौद्योगिकियों तथा रक्षा जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाना मुख्य एजेंडा रहेगा।

मर्ज की यह भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए सैन्य ताकत के खुले इस्तेमाल जैसी घटना के कारण वैश्विक भू-राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण है। ऐसे में दोनों नेता मौजूदा वैश्विक चुनौतियों पर भी चर्चा कर सकते हैं।

आगामी 12–13 जनवरी को होने वाली यह यात्रा जर्मन चांसलर के रूप में मर्ज की पहली एशिया यात्रा होगी। मोदी–मर्ज वार्ता में यूक्रेन में शांति स्थापित करने पर भी चर्चा हो सकती है।

अहमदाबाद में कार्यक्रमों के बाद मर्ज बेंगलुरु जाएंगे।

अधिकारियों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत के अलावा मर्ज साबरमती आश्रम जाएंगे, पतंगोत्सव में हिस्सा लेंगे और अहमदाबाद में एक कौशल विकास कार्यक्रम में भी शामिल होंगे।

जानकारों के अनुसार बातचीत में व्यापार और निवेश संबंधों पर विशेष जोर रहेगा। भारत अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने की पृष्ठभूमि में यूरोप के साथ आर्थिक सहयोग को और प्रगाढ़ बनाना चाहता है।

जर्मनी यूरोप में भारत के सबसे अहम साझेदारों में से एक है। वह यूरोपीय संघ में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। 2024–25 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार 51.23 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

ईयू के साथ भारत के कुल व्यापार का लगभग एक-चौथाई जर्मनी के साथ होता है। 2024–25 में सेवाओं के व्यापार में 12.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह 16.65 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

जर्मनी भारत में नौवां सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है। अप्रैल 2000 से जून 2025 के बीच भारत में जर्मनी से कुल 15.40 अरब डॉलर का एफडीआई आया है। फिलहाल भारत में 2,000 से अधिक जर्मन कंपनियां काम कर रही हैं।

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