अगर भाजपा निकायों चुनाव में जीती तो ‘मराठी मानुष’ हो जाएंगे शक्तिहीन: राज ठाकरे

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मुंबई, आठ जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की चाह रखने वाले लोग केंद्र और राज्य की सत्ता में हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ये लोग महानगर पालिकाओं की सत्ता पर भी काबिज हो गये तो ‘मराठी मानुष’ शक्तिहीन हो जाएंगे।

शिवसेना-उद्धव बालासाहेब ठाकरे (उबाठा) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के साथ एक संयुक्त साक्षात्कार के पहले भाग में मनसे प्रमुख ने कहा कि वह और उनके चचेरे भाई अपने अस्तित्व के लिए नहीं बल्कि राज्य में ‘मराठी मानुष’ के अस्तित्व के लिए एक साथ आए हैं।

ठाकरे भाइयों का साक्षात्कार शिवसेना (उबाठा) के राज्यसभा सदस्य और सामना के कार्यकारी संपादक संजय राउत व जाने-माने निर्देशक महेश मांजरेकर ने लिया। दोनों भाइयों ने 15 जनवरी को होने वाले बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) चुनावों के लिए पिछले महीने गठबंधन की घोषणा की थी।

राज ठाकरे ने सामना को दिए साक्षात्कार में कहा कि राज्य के बाहर से लोग न केवल आजीविका के लिए आ रहे हैं बल्कि वे अपने निर्वाचन क्षेत्र बना रहे हैं।

उन्होंने दावा किया, “यह एक पुराना घाव है। मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने के सपने को साकार करने के प्रयास जारी हैं।”

राज ने कहा कि आज का माहौल कुछ वैसा ही है जैसा संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के दौरान था, जब गुजरात चाहता था कि मुंबई उसका हिस्सा हो जाए।

उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, “मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की चाह रखने वाले केंद्र और राज्य दोनों में सत्ता में हैं।”

मनसे प्रमुख ने दावा किया, “अगर वे (भाजपा) महानगर पालिकाओं पर नियंत्रण कर लेते हैं तो मराठी मानुष कुछ करने की स्थिति में नहीं रहेंगे।”

मनसे प्रमुख ने कहा कि अगर इस पर लगाम लगानी है, तो खासकर मुंबई, पुणे, ठाणे, नासिक, मीरा-भयंदर, कल्याण-डोम्बिवली और छत्रपति संभाजीनगर में नगर निकायों पर नियंत्रण जरूरी है।

उद्धव ठाकरे ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा विकास का ढोंग तो करती है, लेकिन इससे प्रगति की बजाय विनाश होता है। उन्होंने दावा किया कि यह ‘बिना योजना के विकास’ है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “सरकार को खुद नहीं पता कि वह क्या करना चाहती है।”

उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से सत्ता में बैठे लोग मराठी या महाराष्ट्र से हैं लेकिन मुंबई की जनता से उनका कोई लेना-देना नहीं है।

शिवसेना (उबाठा) प्रमुख ने आरोप लगाया, “वे सिर्फ ठेकेदारों के लिए काम करते हैं।”

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