मुझे नहीं लगता कि कश्मीरी पंडित घाटी में स्थायी रूप से रहना चाहते हैं: फारूक अब्दुल्ला

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जम्मू, 19 जनवरी (भाषा) नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि विस्थापित कश्मीरी पंडितों का अपने घर लौटने का हमेशा स्वागत है।

हालांकि, कश्मीरी पंडितों के वर्तमान में देश के अन्य हिस्सों में नये सिरे से जिंदगी की शुरुआत करने का हवाला देते हुए फारूक अब्दुल्ला ने इस बात को लेकर संदेह जताया कि क्या समुदाय अब वापस आना चाहेगा?

पूर्व मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे दिन आया है जब विस्थापित समुदाय 19 जनवरी को ‘नरसंहार दिवस’ के रूप में मना रहा है। यह दिन पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों द्वारा दी गई धमकियों और हत्याओं के कारण कश्मीर घाटी से कश्मीरी पंडितों के 1990 में हुए पलायन की याद दिलाता है।

यहां नेकां के दो दिवसीय कार्यक्रम से इतर अब्दुल्ला ने संवाददाताओं से कहा कि कई कश्मीरी पंडित परिवारों ने घाटी नहीं छोड़ा तथा अपने गांवों और इलाकों में शांतिपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

घाटी में वापस लौटने एवं पुनर्वास के समर्थन में हो रहे प्रदर्शनों के बारे में पूछे जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “वे (कश्मीर) कब लौटेंगे? उन्हें कौन रोक रहा है? कोई उन्हें नहीं रोक रहा है। उन्हें वापस आना चाहिए, क्योंकि यही उनका घर है। कई कश्मीरी पंडित वर्तमान में घाटी में रह रहे हैं और उन्होंने अपने गांव नहीं छोड़े हैं।”

‘यूथ 4 पनुन कश्मीर’ के बैनर तले सैकड़ों कश्मीरी पंडितों ने रविवार शाम जगती कैंप के पास जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया। वे घाटी में अपनी वापसी के लिए एक अलग क्षेत्र की मांग कर रहे हैं और कश्मीरी पंडितों का नरसंहार होने की बात स्वीकार करने संबंधी विधेयक को संसद में पारित करने की मांग की।

विस्थापित कश्मीरी पंडितों की मांगों के बारे में पूछे जाने पर, अब्दुल्ला ने कहा कि उन्होंने उन्हें आश्वासन दिया है कि सरकार उनके लिए आवास का निर्माण कराएगी और आवश्यक सहायता प्रदान करेगी।

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