आदर्श दंपति कैसे बनें

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सफल दाम्पत्य की नींव प्रगाढ़ पारस्परिक प्रेम, सहिष्णुता एवं अटूट मैत्री होती है। अच्छे संबंधों की बुनियाद है ऐसा प्यार जिसमें भेदभाव नहीं होता।  सच्चा प्यार कल-कल बहती उस नदी के समान है, जिसका कोई धर्म नहीं होता। बस बहते रहना ही उसकी नियति है। क्या आप अपने प्यार के मधुर क्षणों को कभी भुला सकते हैं। कदापि नहीं, क्योंंिंक प्यार की यादें विदा नहीं होतीं।
कहते हैं पुरुष अपनी पत्नी (प्रेयसी) में एक बहुत अच्छे मित्र की चाह करता है। यदि मित्रता हो तो ऐसे लोग आदर्श दंपति होते हैं। कई बार कुछ महिलाओं को पति अनुदार मिलते हैं और कुछ पुरुषों को पत्नी असहिष्णु मिलती हैं। पर दाम्पत्य जीवन तभी सफल होता है जब पति-पत्नी एक-दूसरे के पूरक हों।
डॉ. शोभा का कहना है ‘पति को प्रेम के साथ-साथ सम्मान अवश्य देना चाहिए। जो पत्नियां, हमेशा अपने पति की आलोचना करती हैं, वह पति के सम्मान को ठेस पहुंचाती हैं। ऐसी पत्नियों  के चित्त मन ही मन कटुता से भर जाते हैं। पारस्परिक संबंधों के विघटन का कारण बनते है। उसके अन्दर ही अन्दर अग्नि भड़कती है जो धीरे-धीरे दाम्पत्य जीवन को नष्ट कर देती है। यदि आप चाहती है कि पति-पत्नी के संबध प्रगाढ़ बने रहें तो कृपया कलह से बचें और पति की प्रिया बनें। यदि कभी मन में कुछ बुरे विचार आयें भी तो उन्हें जिव्हा पर न लाएं याने जिव्हा पर लगाम लगाएं। इससे आपका कुछ बिगडऩे का नहीं उल्टा संवरने का है। इसी कुलटा जिव्हा के कारण क्या महाभारत नहंीं हुआ? यही कहना है डॉ. अनिल का कि यदि आप अपने काम में लगे हुए है फिर भी कुछ समय अपनी पत्नी के साथ अकेले में अवश्य बिताना चाहिए। कहीं घूम फिर आयें तो फिर निकटता का आभास होता है। यह आदर्श दंपति के लिए एक छोटा-सा नुस्खा है। ऐसा करने से अपनापन हर समय जागरूक रहता है। गड़बड़ वहीं होती है जहां पति या पत्नी अपने सहयोगी को पूर्ण भूला देते है। बस यहीं से टकराव आरंभ हो जाता है और दाम्पत्य जीवन में खटास उत्पन्न हो जाती है। जरा-सी सावधानी से आप अपना आदर्श दाम्पत्य जीवन सुख से बिता सकते हैं। डॉ. शोभा का कहना है कि अपने पति के कार्य में पत्नी को हाथ बंटाना चाहिए। कई बार दोनों की राय भिन्न होती है। इसके लिए खुला दृष्टिकोण रखना चाहिए। यदि पति कोई बात न बताना चाहे तो समझ लें कि बात आपके मतलब की नहीं है। बहुत डिमांडिंग न बनें। यदि पत्नी में यह अवगुण है तो जीवन में कड़वाहट उत्पन्न हो जाती है।
डॉ. अनिल का कहना है कि मेरी पत्नी शोभा तो सबके जीवन में मिठास घोलती है। मेरे माता-पिता को प्यार देती है। यदि पत्नी अपने सास-ससुर की आलोचना करती है, लड़ाई-झगड़ा करती है तो स्वर्ग सा घर नरक बन जाएगा। केवल पति को ही प्यार देने से काम समाप्त नहीं होता। आदर्श दंपत्ति के लिए आवश्यक है कि वह अपने प्यार को पूरे परिवार में बांटे। प्यार को मुटï्ठी में बंद करने की बजाय उसे तो दोनों हाथों से बांटना चाहिए। प्यार बांटने से प्यार मिलता है। जीवन में दु:ख-सुख सांझे होते है। उन्हें मिल जुल कर झेला जाता है। मेरे एक प्रिय मित्र ने अंतर्जातीय विवाह किया है। दोनों ऊंचे पद द्धर आसीन हैं। प्रेम की नींव पर खड़ा उनका दाम्पत्य जीवन आदर्श है। श्रीमती पारिख का कहना है कि वह पूर्णतया एक-दूसरे के पूरक है। उनके सफल दाम्पत्य जीवन की कुंजी परस्पर विश्वास एवं सहनशीलता है। उन्हें एक-दूसरे पर अटूट विश्वास है। यदि किसी प्रकार की कोई समस्या है तो इकटï्ठे बैठकर सुलझाना चाहिए। श्री पारिख का कहना है कि जीवनसाथी की व्यर्थ आलोचना न करें। यदि दोनों कोई समस्या को निजी समस्या समझते हैं तो अधिक छानबीन न करें। बिना मतलब खटास न पैदा करें। समय आने पर वह स्वयं समस्या को बता देंगे। पारस्परिक विश्वास आदर्श दाम्पत्य के लिए आवश्यक है। हो सकता है यदि आपको या जीवनसाथी को क्रोध आता है तो आने दें। सहन कीजिए। उलझें नहीं। नहीं तो बात बढ़ सकती है, एक चुप सौ दु:ख की उक्ति अपनायें।
सुखी दाम्पत्य का अर्थ है एक -दूसरे की भावना का सम्मान करना। कई बार पत्नी पति को भरपूर प्यार दे सकती है, पर उसे बौद्धिक मैत्री भी देनी चाहिए। यह है आदर्श दाम्पत्य का सरल नुस्खा। एक दूसरे के पूरक बनें। एक आदर्श दंपति का मतलब है एक आदर्श जीवनसाथी बनना व जीवन में एक से सपने देखना व एक-दूसरे की भावना का आदर सत्कार करना।

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