जम्मू, 20 जनवरी (भाषा) नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि उनकी पार्टी ने भारत के लिए गोलियों का सामना किया है और जरूरत पड़ने पर वह फिर से ऐसा करने के लिए तैयार है। उन्होंने भाजपा के इस दावे को खारिज कर दिया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस क्षेत्र में पथराव और आतंकवाद को पुनर्जीवित करना चाहती है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने जम्मू और कश्मीर के नए सिरे से विभाजन की मांगों को खारिज करते हुए उन्हें “मूर्खतापूर्ण और अज्ञानतापूर्ण” बताया।
उन्होंने उम्मीद जताई कि 2019 में अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया लद्दाख अंततः पूर्व राज्य में फिर से शामिल होगा।
अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में अतिरिक्त जिलों के निर्माण की संभावना को भी खारिज कर दिया। उन्होंने पीर पंजाल और चिनाब घाटियों के लिए अलग संभाग बनाने की मांग की आलोचना करते हुए इसे ‘डिक्सन प्लान’ का हिस्सा बताया।
यह प्रस्ताव सितंबर 1950 में संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व मुख्य न्यायाधीश सर ओवेन डिक्सन ने भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू और कश्मीर विवाद को सुलझाने के उद्देश्य से पेश किया था।
अपनी पार्टी के दो दिवसीय ब्लॉक अध्यक्ष और सचिव सम्मेलन के अवसर पर पत्रकारों से बातचीत में अब्दुल्ला ने भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के कथित बयान को खारिज किया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी अशांति पर फलती-फूलती हैं और क्षेत्र में पत्थरबाजी और आतंकवाद को फिर से सक्रिय करना चाहती हैं।
अब्दुल्ला ने कहा, “उन्हें बता दो कि अशांति फैलाने वाले हम नहीं हैं, हमने भारत के साथ रहने के लिए गोलियां खाई हैं, और जरूरत पड़ने पर हम फिर से गोलियां खाने के लिए तैयार हैं।”
जब उनसे हाल ही में कुछ भाजपा नेताओं के जम्मू को राज्य का दर्जा देने की वकालत करने वाले बयान के बारे में पूछा गया तो अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी पार्टी ने कभी भी ऐसे विचारों को समर्थन नहीं दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘हम कभी लद्दाख को अलग करना नहीं चाहते थे। लद्दाख को इससे क्या लाभ मिला? यहां तक कि लद्दाख के लोग भी कहते हैं कि वे राज्य के साथ पुनः एकीकरण चाहते हैं; वे केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा नहीं चाहते। यह कैसी बात है? ये लोग मूर्ख और अज्ञानी हैं। यह जम्मू, कश्मीर और लद्दाख का राज्य है और, एक दिन लद्दाख वापस आएगा।’’
पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती की पीर पंजाल और चिनाब घाटियों के लिए संभागीय दर्जा देने और अधिक जिलों के निर्माण की मांग के संबंध में अब्दुल्ला ने दोहराया कि यह ‘डिक्सन प्लान’ का हिस्सा है।
उन्होंने कहा, ‘‘डिक्सन प्लान बहुत पुराना है, जिसमें चिनाब नदी से राज्य को विभाजित कर ‘ग्रेटर कश्मीर’ बनाने का प्रस्ताव था। लेकिन परमार साहब (हिमाचल प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री वाई एस परमार) ने किसी भी विभाजन का विरोध किया था। कई लोग राज्य को तोड़ना चाहते हैं, लेकिन वे कभी सफल नहीं होंगे।