भारतीय शतरंज के स्वर्णिम इतिहास में एक और गौरवशाली अध्याय जुड़ गया है। युवा प्रतिभा आर्यन वार्ष्णेय ने आर्मेनिया में आयोजित प्रतिष्ठित आंद्रानिक मार्गार्यान मेमोरियल टूर्नामेंट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अपना तीसरा व अंतिम ग्रैंडमास्टर नॉर्म पूरा किया और इस उपलब्धि के साथ भारत के 92 वें शतरंज ग्रैंडमास्टर बनने का गौरव हासिल किया।
मात्र 21 वर्ष की आयु में यह मुकाम पाना न केवल उनकी अथक मेहनत, धैर्य और रणनीतिक कौशल का प्रमाण है, बल्कि भारतीय शतरंज की बढ़ती वैश्विक शक्ति को भी रेखांकित करता है। आर्यन की यह सफलता देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है और शतरंज जगत के लिए एक और गौरवपूर्ण क्षण भी।
आर्यन ने सात वर्ष की उम्र में प्रतिभा की पहली चाल चली। इन्होंने शतरंज अपने पिता गौरव वार्ष्णेय से सीखा। गौरव ही इनके कोच, मार्गदर्शक, विश्लेषक और प्रेरणास्रोत रहे हैं। आर्यन ने कभी पेशेवर कोच की मदद नहीं ली। पूरा प्रशिक्षण अपने घर पर ही लिया। अपने आत्मविश्वास और बौद्धिक क्षमता के बल पर सफलता के एक स्वर्णिम अध्याय का इतिहास रचा और आर्यन की इस गौरवपूर्ण उपलब्धि से भारत वर्ष गौरवान्वित हुआ।
अपने शतरंज खेल के सफरनामा में आर्यन ने अपनी एकाग्रता का अद्भुत परिचय देते हुए अपने करियर को संवारने के लिए किताबों से भी दोस्ती कर ली। नतीजा यह रहा कि उचित सामंजस्य और समय प्रबंधन की दृष्टि से उनके व्यक्तित्व का नवनिर्माण हुआ।
आर्यन ग्रैंडमास्टर बनने वाले भारत के 92 वें तथा दिल्ली के 8 वें ग्रैंडमास्टर है। अगस्त 2024 में इंटरनेशनल मास्टर (आई एम) बनने के बिद 15 जनवरी 2026 को ग्रैंडमास्टर बनकर यह कठिन कारनामा कर दिखाया है। उसकी यह उपलब्धि देश के उभरते खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है।
आर्यन वार्ष्णेय ने आर्मेनिया में आयोजित 16 वीं आंद्रानिक मार्गार्यान मेमोरियल टूर्नामेंट में शानदार जीत दर्ज की। राउंड रॉबिन फार्मेट में खेले गए टूर्नामेंट में आर्यन ने अंतिम जी एम नार्म पूरा करके एक राउंड शेष रहते ही यह टाइटल अपने नाम किया। विश्व स्तरीय तैयारी और उत्कृष्ट रणनीति के बलबूते अबआर्यन का अगलामहान लक्ष्य विश्व चैंपियनशिप के शिखर पर पहुँचना है। *(लेखक छत्तीसगढ़ प्रदेश शतरंज संघ के सचिव है)