राज्यपाल का माइक बंद किया गया, संबोधन ‘भ्रामक’ होने के कारण नहीं पढ़ा : तमिलनाडु लोकभवन

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चेन्नई, 20 जनवरी (भाषा) तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि ने मंगलवार को विधानसभा में द्रमुक सरकार द्वारा तैयार परंपरागत अभिभाषण पढ़ने से इसलिए ‘इनकार’ कर दिया, क्योंकि उसमें कई ‘अप्रमाणित दावे और भ्रामक बयान’ शामिल थे। लोकभवन ने यह दावा किया।

राज्यपाल के सदन से बाहर निकलने के तुरंत बाद विधानसभा में मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन द्वारा पेश एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें कहा गया कि केवल सरकार द्वारा तैयार परंपरागत अभिभाषण ही आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा।

इसके कुछ ही देर बाद लोकभवन ने सदन के भीतर हुई घटनाओं को लेकर स्पष्टीकरण देते हुए एक बयान जारी किया। लोकभवन ने आरोप लगाया कि राष्ट्रगान का एक बार फिर “अपमान” किया गया। साथ ही, जनता को परेशान करने वाले कई अहम मुद्दों को पूरी तरह अनदेखा किया गया।

राज्यपाल रवि परंपरागत अभिभाषण की शुरुआत में राष्ट्रगान बजाने की मांग कर रहे थे, जबकि राज्य सरकार का कहना है कि परंपरा के अनुसार शुरुआत में तमिल थाई वाज़्थु और अंत में राष्ट्रगान बजाया जाता है।

234 सदस्यीय विधानसभा में बिना संबोधन दिए राज्यपाल के बाहर निकलने के कुछ मिनट बाद लोकभवन ने 13 बिंदुओं वाला एक विवरण जारी किया, जिसमें बताया गया कि राज्यपाल ने संबोधन पढ़ने से क्यों “इनकार” किया। इसमें आरोप लगाया गया कि राज्यपाल का माइक “बार-बार बंद किया गया और उन्हें बोलने नहीं दिया गया।”

लोकभवन के अनुसार, “भाषण में कई अप्रमाणित दावे और भ्रामक बयान हैं। जनता को प्रभावित करने वाले कई गंभीर मुद्दों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।” इसमें तमिलनाडु सरकार के इस दावे को भी “सच्चाई से परे” बताया गया कि राज्य ने 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया है।

बयान में कहा गया कि कई समझौता ज्ञापन केवल कागजों तक सीमित हैं और वास्तविक निवेश उसका एक छोटा हिस्सा ही है। निवेश के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि चार साल पहले जहां तमिलनाडु प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पाने वाले राज्यों में चौथे स्थान पर था, वहीं अब वह छठे स्थान पर बने रहने के लिए संघर्ष कर रहा है।

लोकभवन ने यह भी आरोप लगाया कि महिला सुरक्षा के मुद्दे को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया, जबकि पॉक्सो के तहत बलात्कार के मामलों में 55 प्रतिशत से अधिक और महिलाओं से छेड़छाड़ के मामलों में 33 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। मादक पदार्थों और नशीली दवाओं की बढ़ती समस्या, खासकर युवाओं और स्कूली छात्रों में नशे के मामलों में तेज बढ़ोतरी को भी गंभीर चिंता बताया गया।

बयान में दावा किया गया कि एक वर्ष में नशे के कारण 2,000 से अधिक, ज्यादातर युवा, आत्महत्या कर चुके हैं। इसके अलावा, दलितों पर अत्याचार और दलित महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा के मामलों में वृद्धि का आरोप लगाते हुए बयान में कहा गया कि इस पर भी भाषण में कोई उल्लेख नहीं है।

लोकभवन के अनुसार, राज्य में एक वर्ष में लगभग 20,000 लोगों ने आत्महत्या की, यानी प्रतिदिन करीब 65 मामले, और तमिलनाडु को “भारत की आत्महत्या राजधानी” कहा जाने लगा है, फिर भी सरकार चिंतित नहीं दिखती।

लोकभवन से जारी बयान में शिक्षा के स्तर में गिरावट, शैक्षणिक संस्थानों में कुप्रबंधन, वर्षों से खाली पड़े 50 प्रतिशत से अधिक शिक्षकों के पद, पंचायत चुनाव न होने से हजारों ग्राम पंचायतों के निष्क्रिय होने, मंदिरों के प्रबंधन, एमएसएमई क्षेत्र पर बढ़ते दबाव और निचले स्तर के कर्मचारियों में असंतोष जैसे मुद्दों को भी अभिभाषण में पूरी तरह नजरअंदाज किए जाने का आरोप लगाया गया।

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