नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा के बाद निर्यातक सतर्क हैं।
निर्यातकों का कहना है कि अतिरिक्त शुल्क के प्रभाव का आकलन ट्रंप प्रशासन द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद ही किया जा सकेगा।
भारतीय निर्यातक पहले से 50 प्रतिशत अमेरिकी शुल्क का सामना कर रहे हैं।
ट्रंप ने घोषणा की है कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश को अमेरिका के साथ अपने व्यापार पर 25 प्रतिशत शुल्क का भुगतान करना होगा। यह एक ऐसा कदम जो भारत, चीन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे ईरान के प्रमुख व्यापारिक भागीदारों को प्रभावित कर सकता है।
निर्यातकों के संगठन ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस’ (फियो) ने मंगलवार को कहा कि घरेलू कंपनियां ईरान के साथ व्यापार से संबंधित सभी प्रतिबंधों का अनुपालन कर रही हैं। हालांकि ट्रंप की ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों को 25 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा पर स्पष्ट जानकारी मिलने पर ही इस चेतावनी के प्रभाव का आकलन संभव हो पाएगा।
ट्रंप की घोषणा से भारत-ईरान व्यापार संबंधों पर असर पड़ सकता है।
फियो के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, ‘‘ भारतीय कंपनियां और बैंक, ईरान पर लगाए गए ओएफएसी (विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय) प्रतिबंधों का पूरी तरह से और स्पष्ट रूप से पालन कर रहे हैं। हम केवल खाद्य पदार्थों और दवा क्षेत्र में ही काम कर रहे हैं जिनपर रोक नहीं है, इसलिए भारत पर किसी भी प्रतिकूल प्रभाव की आशंका का कोई आधार नहीं है।’’
एक निर्यातक ने कहा, ‘‘ हम अमेरिकी राष्ट्रपति की घोषणा से चिंतित हैं। हम इस संबंध में अमेरिका से अधिसूचना की प्रतीक्षा कर रहे हैं।’’
भारत से ईरान को होने वाले प्रमुख निर्यातों में चावल, चाय, चीनी, दवा, कृत्रिम रेशे, विद्युत मशीनरी और कृत्रिम आभूषण शामिल हैं। प्रमुख आयातों में सूखे मेवे, अकार्बनिक/कार्बनिक रसायन और कांच के बर्तन शामिल हैं।
भारत-ईरान संबंधों का एक महत्वपूर्ण पहलू चाबहार बंदरगाह का संयुक्त विकास है। ऊर्जा से भरपूर ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित इस बंदरगाह का विकास भारत और ईरान द्वारा संपर्क एवं व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है।
भारत का ईरान को माल निर्यात 2024-25 में 1.55 प्रतिशत बढ़कर 1.24 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया जबकि आयात 29.32 प्रतिशत घटकर 44.183 करोड़ अमेरिकी डॉलर रह गया।