डिब्रूगढ़, 30 जनवरी (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि यूरोपीय संघ-भारत मुक्त व्यापार समझौता से सुनिश्चित होगा कि असम चाय की खेप बिना किसी शुल्क यूरोपीय देशों तक पहुंचे।
शाह ने डिब्रूगढ़ के खानिकर परेड ग्राउंड में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल में हुए व्यापार समझौते के जरिये असम की चाय की पेरिस और बर्लिन के साथ-साथ यूरोपीय संघ के अन्य देशों तक पहुंच सुनिश्चित की है।
उन्होंने कहा, ‘‘यूरोपीय संघ-भारत व्यापार समझौता यूरोपीय देशों को असम की चाय के निर्यात को और बढ़ावा देगा।’’
भारत और यूरोपीय संघ ने मंगलवार को ‘ऐतिहासिक’ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए। इसे अबतक तक सबसे बड़ा व्यापार समझौता कहा जा रहा है। ईयू-भारत एफटीए का उद्देश्य दो अरब लोगों का बाजार तैयार करना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व ने नियम-आधारित विश्व व्यवस्था की रक्षा के लिए व्यापार और रक्षा का लाभ उठाने के लिए एक परिवर्तनकारी एजेंडा का अनावरण किया।
केंद्रीय मंत्री ने चाय बागान श्रमिकों को ‘असम और भारत को दुनिया में चाय के अग्रणी निर्यातकों में से एक के रूप में एक विशिष्ट पहचान देने’ के लिए धन्यवाद दिया।
असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए इस साल मार्च-अप्रैल में चुनाव होने हैं।
उन्होंने कहा,‘डिब्रूगढ़ को चाय की राजधानी के रूप में जाना जाता है, और बागान श्रमिकों ने यह सुनिश्चित किया है कि असम की चाय की सुगंध दुनिया भर में पहुंचे। यह राज्य अपनी चाय के लिए विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त है। यह श्रमिकों की कड़ी मेहनत का ही नतीजा है।’’
शाह ने कहा कि चाय बागान श्रमिकों ने राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है और साथ ही यह भी सुनिश्चित किया है कि यह पेय एक प्रमुख निर्यात वस्तु बना रहे।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता ने आरोप लगाया कि विपक्षी कांग्रेस ने ‘‘बागवानी श्रमिकों के कल्याण के लिए कुछ नहीं किया, जिन्होंने असम, विशेष रूप से डिब्रूगढ़ को देश की चाय राजधानी के रूप में स्थापित किया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने यह सुनिश्चित करने के लिए कानून में संशोधन किया है कि चाय बागान श्रमिकों को भूमि का स्वामित्व अधिकार प्राप्त हो।’’
शाह ने कांग्रेस पर असम और उसकी चाय को बदनाम करने के लिए ‘टूलकिट’ देने का आरोप लगाया।
ऊपरी असम के विधानसभा क्षेत्रों में निवास करने वाले मतदाताओं में चाय बागान श्रमिकों की एक बड़ी संख्या है। पहले इस वर्ग को कांग्रेस का ‘वोटबैंक’ माना जाता था, लेकिन 2014 के बाद से इस वर्ग का झुकाव भाजपा की ओर बढ़ा है।