कोलकाता में इलेक्ट्रिक दोपहिया चालक हॉर्न बजाते हैं, बेंगलुरु में अचानक ब्रेक लगाते हैं:एथर एनर्जी

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नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) कोलकाता में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन चालक सबसे अधिक हॉर्न बजाते हैं जबकि बेंगलुरु में लोग बार-बार अचानक ब्रेक लगाते हैं।

एथर एनर्जी की 2025 ‘राइडिंग इनसाइट्स’ रिपोर्ट समूचे भारत में ‘वायरलेस’ नेटवर्क से जुड़े अपने पांच लाख से अधिक इलेक्ट्रिक स्कूटर से एकत्रित डेटा पर आधारित इलेक्ट्रिक दोपहिया विनिर्माता के विश्लेषण पर आधारित है।

इसमें सामने आया कि चालक दैनिक आवागमन के दौरान ‘कनेक्टेड’ प्रौद्योगिकी यानी इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क पर तेजी से निर्भर हो रहे हैं और शहर-स्तरीय वाहन चालन से पता चलता है कि सॉफ्टवेयर वास्तविक दुनिया के परिवहन को कैसे आकार दे रहा है।

आंकड़ों से पता चला कि शहरों में हॉर्न बजाने के मामले में काफी भिन्नता है। कोलकाता में देश में लोग सबसे अधिक हॉर्न बजाते हैं। वहां औसतन 131 हॉर्न प्रति घंटा बजते हैं जो भारी यातायात एवं आक्रामक ध्वनि प्रदूषण को दर्शाता है।

दूसरी ओर, पुणे और हैदराबाद जैसे शहर सबसे शांत शहरों के रूप में उभरे जो अपेक्षाकृत शांत एवं अधिक अनुशासित माहौल का संकेत देते हैं।

दक्षिण भारत के मझोले शहरों और छोटे कस्बों में भी वाहन चलाने का स्थिर व्यवहार देखने को मिला जिसमें अचानक ब्रेक लगाने और हॉर्न बजाने के मामले कम दिखे।

एथर एनर्जी के मुख्य व्यवसाय अधिकारी रवनीत फोकेला ने कहा, ‘‘ हमारे साल के अंत के विश्लेषण से पता चलता है कि सॉफ्टवेयर परिवहन का एक सक्रिय हिस्सा बन रहा है। इससे लोगों को सड़क की स्थितियों पर बेहतर प्रतिक्रिया देने, चालक व्यवहार की निगरानी करने और सुरक्षा में सुधार करने में मदद मिल रही है।’’

उन्होंने कहा कि दोपहिया वाहन भारत में व्यक्तिगत परिवहन का सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला विकल्प बना हुआ है लेकिन वर्तमान में इस बात की बहुत सीमित जानकारी उपलब्ध है कि लोग वास्तव में हर दिन कैसे वाहन चलाते हैं।

एथर एनर्जी के साल के अंत के विश्लेषण से यह भी पता चला कि सुरक्षा संबंधी सॉफ्टवेयर सुविधाओं का उपयोग प्रतिदिन तेजी से बढ़ रहा है।

एथर की ‘फॉलसेफ’ प्रणाली स्कूटर के पलटने पर मोटर को स्वचालित रूप से बंद कर देती है। मुंबई और बेंगलुरु में प्रति स्कूटर इसका इस्तेमाल करीब हर दो साल में एक बार से कम किया गया।

इसमें कहा गया, ‘‘ इसके विपरीत, दिल्ली और हैदराबाद जैसे शहरों में इसके इस्तेमाल की दर अधिक रही जो सड़क की स्थिति, भारी यातायात और वाहन चलाने के तरीके को दर्शाता है।’’

सुरक्षा एवं स्थिति की जानकारी बढ़ाने के लिए तैयार की गई एक ‘कनेक्टेड’ सुविधा ‘लाइव लोकेशन शेयरिंग’ का उपयोग अधिक भीड़भाड़ वाले शहरी केंद्रों में अधिक सक्रिय रूप से किया गया।

एथर एनर्जी ने कहा, ‘‘ आगरा, कोटा और नयी दिल्ली में चालकों ने पोरवोरिम और रामनगर जैसे छोटे, शांत शहरों के चालकों की तुलना में दो से तीन गुना अधिक बार अपनी ‘लाइव लोकेशन’ साझा की।’’

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