नयी दिल्ली, 18 जनवरी (भाषा) देश की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) ने कई वर्षों तक लगातार घाटा उठाने के बाद वित्त वर्ष 2024-25 में सामूहिक रूप से 2,701 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है। रविवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।
राज्य बिजली बोर्डों के पुनर्गठन और निगमीकरण के बाद से ही वितरण कंपनियां घाटे में चल रही थीं। बिजली मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में इन कंपनियों को 25,553 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2013-14 में 67,962 करोड़ रुपये का भारी घाटा हुआ था।
वित्त वर्ष 2024-25 के परिणामों पर टिप्पणी करते हुए बिजली मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि यह वितरण क्षेत्र के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है।
उन्होंने कहा कि यह मंत्रालय द्वारा बिजली वितरण क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने के लिए उठाए गए विभिन्न कदमों का परिणाम है। मंत्री ने कहा, ”भारत न केवल अपनी बल्कि दुनिया की प्रगति को गति दे रहा है और इसमें ऊर्जा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है।”
उन्होंने कहा कि सरकार इस क्षेत्र में आवश्यक सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है ताकि बिजली क्षेत्र भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था को सहारा दे सके और ‘विकसित भारत’ की यात्रा में अपना योगदान दे सके।
मंत्रालय ने बताया कि सुधारों का असर न केवल मुनाफे में, बल्कि अन्य प्रदर्शन संकेतकों में भी दिख रहा है। एग्रीगेट तकनीकी और वाणिज्यिक (एटीएंडसी) घाटे में भी कमी आई है, जो इस क्षेत्र में बदलाव का संकेत है।
वित्त वर्ष 2013-14 में एटीएंडसी घाटा 22.62 प्रतिशत था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में घटकर 15.04 प्रतिशत रह गया है।
इसके अलावा, लागत वसूली में सुधार के संकेत देते हुए, आपूर्ति की औसत लागत और औसत राजस्व प्राप्ति (एसीएस-एआरआर) के बीच का अंतर वित्त वर्ष 2013-14 के 0.78 रुपये प्रति यूनिट से घटकर वित्त वर्ष 2024-25 में 0.06 रुपये प्रति यूनिट रह गया।
इस क्षेत्र में सुधार के लिए ‘पुनरुद्धार वितरण क्षेत्र योजना’ (आरडीएसएस) जैसी पहलों ने अवसंरचना के आधुनिकीकरण और स्मार्ट मीटरिंग के जरिए वित्तीय स्थिति सुधारने में मदद की है।