नयी दिल्ली, नौ जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि वकीलों के लिए नैतिक मूल्यों के मानदंड उच्च हैं। न्यायालय ने यह टिप्पणी तेलंगाना के एक वकील की याचिका खारिज करते हुए की जिसे लंबित आपराधिक शिकायतों के कारण आगामी राज्य बार काउंसिल चुनाव लड़ने से रोका गया है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने टिप्पणी की कि ‘‘वह ऐसा व्यक्ति नहीं है जिसे (तेलंगाना राज्य बार काउंसिल) चुनाव लड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए।’’
शीर्ष अदालत तेलंगाना उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता रापोलु भास्कर की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने राज्य बार काउंसिल में अधिवक्ता की अयोग्यता से संबंधित प्रावधानों को चुनौती दी है।
प्रावधानों का हवाला देते हुए भास्कर का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने कहा कि उन्हें किसी भी मामले में न तो दोषी ठहराया गया है और न ही दंडित किया गया है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘वकीलों के लिए नैतिक मूल्यों का स्तर ऊंचा होता है।’’
उन्होंने कहा कि जब कोई दागी व्यक्ति आम चुनाव लड़ रहा होता है तो वकील अक्सर अदालतों का रुख करते हैं।
बार नेताओं के बारे में हाल ही में बनी खराब धारणा का जिक्र करते हुए, प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यदि बार निकाय कुछ पेशेवर मानकों को बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं तो उन्हें ऐसा करने से रोका नहीं जाना चाहिए।
भास्कर के वकील ने कहा कि उन्होंने अपने करियर में अब तक लगभग 22,000 मामले दायर किए हैं और उन्हें तीसरे पक्ष द्वारा दायर की गई दो शिकायतों के आधार पर चुनाव लड़ने से नहीं रोका जाना चाहिए।
वरिष्ठ अधिवक्ता और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि राज्य बार काउंसिल के निर्वाचित सदस्य वकीलों के खिलाफ अनुशासनात्मक मामलों का फैसला करके अर्ध-न्यायिक कार्य भी करते हैं।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यदि वकील इस दलील पर अड़े रहते हैं कि उनकी याचिका पर फैसला किया जाए, तो पीठ कुछ आदेश पारित करेगी। संभावित नतीजे को भांपते हुए वकील ने अंततः मामला वापस लेने का फैसला किया।
उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार, तेलंगाना में राज्य बार काउंसिल के चुनाव 31 जनवरी तक संपन्न होने निर्धारित हैं।