मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने बेल्लारी हिंसा की सीबीआई जांच की भाजपा की मांग को खारिज किया

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मैसूरु (कर्नाटक), 18 जनवरी (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने बेल्लारी हिंसा की सीबीआई जांच की भाजपा की मांग खारिज करते हुए ऐसी जांच की मांग करने के लिए उसके नैतिक अधिकार पर रविवार को सवाल उठाया।

बेल्लारी हिंसा में एक व्यक्ति की जान चली गयी थी।

सिद्धरमैया ने यहां पत्रकारों से कहा कि भाजपा ने अपने कार्यकाल में एक भी मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को नहीं सौंपा।

उन्होंने सीबीआई जांच की मांग को ‘राजनीति से प्रेरित’ करार देते हुए कहा कि इसमें कोई दम नहीं है।

मुख्यमंत्री ने पूछा, “जब वह सत्ता में थी और हम विपक्ष में थे, तब उसने सीबीआई को कितने मामले सौंपे थे? अगर उसने ऐसा नहीं किया, तो फिर उसे इस तरह की मांग करने का क्या नैतिक अधिकार है?”

उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री के रूप में अपने पिछले कार्यकाल के दौरान, मैंने सीबीआई को कई मामले सौंपे थे, जिनमें तत्कालीन गृह मंत्री के. जे. जॉर्ज के खिलाफ (एक डीएसपी आत्महत्या मामले में) लगे आरोप, लॉटरी मामला और दक्षिण कन्नड़ जिले के धर्मस्थल में सौजन्या की संदिग्ध मौत आदि शामिल हैं।”

भाजपा के राज्यव्यापी आंदोलन के फैसले पर सिद्धरमैया ने कहा कि विपक्ष विरोध प्रदर्शन के लिए स्वतंत्र है।

उन्होंने कहा, “उसे ऐसा करने दीजिए। विपक्षी दल होने के नाते यह उसका अपना निर्णय होगा। हम उसे जवाब देंगे, (जवाब) देना ही होगा।”

बेल्लारी के कुछ इलाकों में एक जनवरी की रात तनाव फैल गया था। दिन में बेल्लारी शहर के कांग्रेस विधायक नारा भरत रेड्डी और गंगावती के भाजपा विधायक जी जनार्दन रेड्डी के समर्थकों के बीच बैनर लगाने के मुद्दे पर कथित तौर पर झड़प हो गई थी एवं स्थिति हिंसक हो गई थी। इस दौरान कथित तौर पर पथराव और गोलीबारी हुई थी, जिसमें एक कांग्रेस कार्यकर्ता की मौत हो गई।

विधानसभा का सत्र 22 से 31 जनवरी तक आहूत करने को लेकर भाजपा के आरोपों का जवाब देते हुए सिद्धरमैया ने कहा कि साल का पहला सत्र संयुक्त सत्र होना अनिवार्य है।

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) से संबंधित मुद्दे भी सत्र बुलाने का एक प्रमुख कारण थे।

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