गुणवत्तापूर्ण उत्पाद सुनिश्चित करने को बीआईएस को तेजी से नए मानक विकसित करने होंगे: जोशी

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नयी दिल्ली, छह जनवरी (भाषा) केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने लोगों को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद और सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) को नए मानक शीघ्रता से विकसित करने तथा परीक्षण प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण करने का मंगलवार को आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि बीआईएस गुणवत्ता मानकों की व्यवस्था को कुशलतापूर्वक विनियमित कर रहा है लेकिन अब उसे एक ऐसा अनुकूल माहौल बनाने पर भी ध्यान देना चाहिए जहां विनिर्माण उद्योग स्वयं कुछ मानकों से नीचे के उत्पाद न बनाए।

बीआईएस के 79वें स्थापना दिवस पर यहां आयोजित कार्यक्रम में जोशी ने कहा, ‘‘ प्रधानमंत्री (नरेन्द्र) मोदी की अगुवाई वाली सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि भारत के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित, विश्वसनीय एवं उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों तथा सेवाओं तक पहुंच प्राप्त हो।’’

उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य को प्राप्त करने में बीआईएस की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।

जोशी ने कहा, ‘‘ बीआईएस चिह्न कई क्षेत्रों में भरोसे का प्रतीक बन गया है जो कृषि, विनिर्माण और प्रौद्योगिकी में विकास को बढ़ावा देता है। देश में गुणवत्ता के परिदृश्य को आकार देने में बीआईएस की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 1947 में अपनी स्थापना के बाद से, बीआईएस एक सशक्त संस्था के रूप में विकसित हुआ है जो विभिन्न क्षेत्रों में मानकों को तैयार करता है, लागू करता है और बढ़ावा देता है।’’

मंत्री ने इस बात का उल्लेख किया कि मोदी सरकार ने नया बीआईएस अधिनियम 2016 लाया, जिसने ब्यूरो को भारत के राष्ट्रीय मानक निकाय के रूप में स्थापित किया। यह अधिनियम घटिया उत्पादों के निर्माण और आयात को रोककर उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद एवं सेवाएं प्रदान करता है।

जोशी ने कहा कि भारत एक विनिर्माण केंद्र बनना चाहता है जिसके लिए गुणवत्तापूर्ण वस्तुओं के उत्पादन की आवश्यकता होगी।

उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना एवं व्यापार सुगमता सुनिश्चित करना आवश्यक है।

जोशी ने कहा कि खिलौनों के लिए गुणवत्ता मानक तय करने से घरेलू उत्पादन बढ़ाने एवं आयात पर अंकुश लगाने में मदद मिली है।

उन्होंने कहा, ‘‘ जब हम कोई निर्णय लेते हैं, तो हम बदलाव ला सकते हैं।’’

मंत्री ने उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद एवं सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए जन आंदोलन का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि कई देशों में उद्योग निकाय गुणवत्ता मानक तय करते हैं और उन मानकों से नीचे के उत्पाद नहीं बनाते।

जोशी ने कहा कि भारत केवल गुणवत्ता मानकों को विनियमित एवं अनिवार्य बनाकर विकसित राष्ट्र नहीं बन सकता और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकता।

उन्होंने कहा, ‘‘ बीआईएस ने अब तक एक संस्था के रूप में अच्छा विनियमन किया है और आपने उन्हें प्रेरित करने की अच्छी कोशिश की है। अब, हम इसे जन आंदोलन कैसे बना सकते हैं?’’

मंत्री ने कहा कि ऐसा माहौल बनाने की दिशा में काम करने की आवश्यकता है जहां उद्योग स्वयं निर्धारित मानकों से नीचे के उत्पाद न बनाए।

जोशी ने कहा कि देश अपने पास मौजूद मानव संसाधनों के साथ गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बना सकता है और उन्होंने भारत में मोबाइल विनिर्माण की सफलता का उदाहरण दिया।

मंत्री ने साथ ही कहा, ‘‘ मानवीय हस्तक्षेप को कम करने के लिए बीआईएस प्रयोगशालाओं का नवीनतम एवं परिष्कृत उपकरणों की खरीद के माध्यम से लगातार आधुनिकीकरण करना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि बीआईएस को मानक निर्धारण प्रक्रियाओं में तेजी लानी चाहिए, खासकर राष्ट्रीय प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों के लिए और तकनीकी समितियों को यथाशीघ्र नए मानक विकसित करने चाहिए।

वर्तमान में, लगभग 23,700 भारतीय मानक लागू हैं। इनमें से लगभग 94 प्रतिशत भारतीय मानक वैश्विक आईएसओ/आईईसी मानकों के अनुरूप हैं।

भारतीय मानक संस्थान (आईएसआई) की स्थापना छह जनवरी 1947 को की गई थी। जून 1947 में डॉ. लाल सी. वर्मन ने इसके पहले निदेशक के रूप में पदभार संभाला था।

भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की स्थापना संसद के एक अधिनियम के माध्यम से एक अप्रैल, 1987 को हुई थी। इसे व्यापक कार्यक्षेत्र एवं अधिक शक्तियां प्रदान की गईं और इसने पूर्ववर्ती आईएसआई के कर्मचारियों, संपत्तियों, देनदारियों और कार्यों को संभाला।

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