नयी दिल्ली, सात जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राष्ट्रीय राजधानी के होटल, क्लब और रेस्तरां में आग और अन्य घटनाओं से बचने के सुरक्षा उपायों को लागू करने के लिए एक कार्य योजना तैयार करें।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने इस तथ्य पर संज्ञान लिया कि याचिकाकर्ता ने अधिकारियों से संपर्क किए बिना अदालत का रुख किया। पीठ ने इसी के साथ याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह अधिकारियों को एक अभ्यावेदन दे।
अदालत ने अधिकारियों से राष्ट्रीय राजधानी के होटल, क्लबों और रेस्तरां में अग्नि सुरक्षा सहित सुरक्षा ऑडिट कराने का अनुरोध करने वाली याचिका पर भी विचार करने को कहा।
पीठ ने कहा, ‘‘रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह ज्ञात हो कि इस अदालत में आने से पहले याचिकाकर्ता ने अधिकारियों से संपर्क किया था। हम इस रिट याचिका का निस्तारण इस निर्देश के साथ करते हैं कि इसे अधिकारियों को प्रस्तुत अभ्यावेदन के रूप में माना जाए।’’
पीठ ने अधिकारियों से इस निवेदन पर विचार करने और नियमों एवं कानूनों के अनुसार शीघ्रता से उचित निर्णय लेने को कहा। अदालत ने आगे कहा कि उन्हें मुद्दों का समाधान करना चाहिए और सुरक्षा उपायों को लागू करने के लिए एक कार्य योजना तैयार करनी चाहिए ताकि आग लगने की घटनाओं और अन्य दुर्घटनाओं से बचा जा सके।
याचिका में दिल्ली सरकार, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) को प्रतिवादी बनाया गया था।
अदालत अधिवक्ता अर्पित भार्गव की ओर से दाखिल इस याचिका में अधिकारियों को सुरक्षा ऑडिट करने और समयबद्ध तरीके से जोन-वार रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।