ए आर रहमान ने अपनी टिप्पणी को लेकर दी सफाई, कहा- किसी को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं था

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नयी दिल्ली, 18 जनवरी (भाषा) जानेमाने संगीतकार ए आर रहमान ने रविवार को अपने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने हाल में दिए गए एक साक्षात्कार में अपनी टिप्पणी के बाद हो रही आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा कि इरादे “कभी-कभी गलत समझे जा सकते हैं”, लेकिन वह अपने शब्दों से किसी को ठेस पहुंचाना नहीं चाहते थे।

“रोजा”, “बॉम्बे” और “दिल से…” जैसी फिल्मों में अपने संगीत के लिए जाने जाने वाले रहमान ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने यह स्पष्टीकरण दिया।

संगीतकार रहमान (59) ने कहा कि संगीत हमेशा से “भारत की संस्कृति से जुड़ने और उसका सम्मान करने का एक तरीका रहा है।”

उन्होंने वीडियो में कहा, ‘‘भारत मेरी प्रेरणा, मेरा गुरु और मेरा घर है। मैं समझता हूं कि कभी-कभी इरादों को गलत समझा जा सकता है। हालांकि मेरा उद्देश्य हमेशा संगीत के माध्यम से उत्थान, सम्मान और सेवा करना रहा है। मैंने कभी किसी को दुख पहुंचाने की इच्छा नहीं रखी और मुझे उम्मीद है कि मेरी ईमानदारी महसूस की जाएगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय होने पर मुझे गर्व है क्योंकि यह मुझे एक ऐसा मंच बनाने की शक्ति देता है जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और बहुसांस्कृतिक आवाजों का जश्न मनाने की अनुमति देता है।’’

उन्होंने कहा कि उनकी संगीत यात्रा हमेशा ईमानदारी और उद्देश्य से जुड़ी रही है। उन्होंने वेव समिट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समक्ष ‘जला’ की प्रस्तुति, रूह-ए-नूर और नगालैंड के युवा संगीतकारों के साथ काम और बहुसांस्कृतिक वर्चुअल बैंड सीक्रेट माउंटेन बनाने का उल्लेख किया। साथ ही, नितेश तिवारी की रणबीर कपूर अभिनीत फिल्म ‘रामायण’ के लिए संगीत तैयार करने को गर्व और सम्मान की बात बताया। उन्होंने कहा, ‘‘हर यात्रा ने मेरे उद्देश्य को और मजबूत किया है।’’

रहमान की ये टिप्पणी बीबीसी एशियन नेटवर्क के साथ एक साक्षात्कार के कुछ दिनों बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पिछले कुछ वर्षों में हिंदी फिल्म उद्योग में सत्ता परिवर्तन के कारण उन्हें कम काम मिल रहा है और कहा कि इसका कारण “सांप्रदायिक” भी हो सकता है।

उन्होंने साक्षात्कार में कहा था, ‘‘मैं काम की तलाश में नहीं रहता। मैं चाहता हूं कि ईमानदारी से काम करने की बदौलत काम खुद मेरे पास आए। मुझे लगता है कि जब मैं चीजों की तलाश में निकलता हूं तो वह एक तरह का अपशकुन होता है। आज फैसले ऐसे लोगों के हाथ में हैं जो रचनात्मक नहीं हैं। इसमें सांप्रदायिक रंग भी हो सकता है, हालांकि यह कभी सीधे तौर पर मेरे सामने जाहिर नहीं हुआ। मुझे यह कानाफूसी के तौर पर पता चलता है कि उन्होंने आपको बुक किया था, लेकिन म्यूजिक कंपनी ने आगे बढ़कर उनके पांच कंपोजर को काम दे दिया।’’

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