बदलावों को सहजता से स्वीकारें

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 जीवन का अर्थ ही निरंतर गतिशीलता है। स्थिरता केवल शून्य में है, जबकि जीवन तो हर क्षण परिवर्तन और प्रवाह से भरा हुआ है। जन्म से लेकर मृत्यु तक इंसान असंख्य बदलावों से गुजऱता है और इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं कि बचपन से किशोरावस्था, युवावस्था से प्रौढ़ावस्था, रिश्तों का बदलता स्वरूप, परिस्थितियों का उतार-चढ़ाव, और समय की बदलती रफ़्तार। इन परिवर्तनों को टालना किसी के लिए भी असंभव है। अत: इन्हें स्वीकार करना हमारी विवशता है।
लेकिन असली प्रश्न यह है कि क्या हम बदलावों को मजबूरी समझकर अपनाते हैं या सहजता और सकारात्मकता के साथ गले लगाते हैं? यही अंतर हमारी मानसिकता, हमारे व्यक्तित्व और हमारे जीवन की गुणवत्ता तय करता है और हमारे व्यक्तित्व की पहचान भी इसी से होती है कि हम कैसे अपने जीवन में आए उतार चढ़ाव को नियंत्रित करते हैं बिना अपने स्वभाव की स्वाभाविकता को खोए ।
बदलाव – जीवन का स्वाभाविक हिस्सा: प्रकृति का नियम है कि हर चीज़ बदलती है। ऋतुएँ बदलती हैं, दिन-रात बदलते हैं, नदी का जल बहता हुआ बदलता रहता है। इसी तरह हमारे जीवन की परिस्थितियाँ भी बदलती हैं। यदि हम इस सत्य को समझ लें कि बदलाव ही स्थायी है, तो हम किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं होंगे।
विवशता और विशेषता का फर्क: बदलावों को अपनाना हमारी विवशता हो सकती है क्योंकि हमारे पास विकल्प नहीं होता। लेकिन इन बदलावों को सहजता, मुस्कान और आत्मविश्वास के साथ अपनाना हमारी विशेषता है। यही विशेषता हमें परिपक्व और संतुलित बनाती है। जो लोग हर बदलाव में अवसर खोज लेते हैं, वे कभी हताश नहीं होते, बल्कि हर परिस्थिति को अपने विकास का ज़रिया बना लेते हैं।
अपनी मौलिकता को न खोएं: अक्सर लोग बदलावों की भीड़ में अपनी असली पहचान खो बैठते हैं। वे दूसरों की अपेक्षाओं और परिस्थितियों के दबाव में स्वयं को ढाल लेते हैं, लेकिन धीरे-धीरे उनकी स्वाभाविकता और मौलिकता नष्ट होने लगती है। यह सबसे बड़ी त्रासदी है। बदलावों को स्वीकारना चाहिए, लेकिन इस शर्त पर कि हमारी आत्मा की रोशनी, हमारे विचारों की सच्चाई और हमारे व्यक्तित्व की मौलिकता सुरक्षित रहे।
सकारात्मक दृष्टिकोण का महत्व: यदि हम हर बदलाव को अवसर की दृष्टि से देखें, तो हमें जीवन का हर पड़ाव सीखने और आगे बढऩे का नया द्वार लगता है। चाहे परिस्थिति कठिन क्यों न हो, उसमें छिपे सबक को पहचानकर हम अपने जीवन को और अधिक सशक्त बना सकते हैं।
जीवन में बदलाव अपरिहार्य हैं। उन्हें रोकना या उनसे भागना संभव नहीं है। लेकिन अपने व्यक्तित्व की स्वाभाविकता और मौलिकता को बनाए रखते हुए यदि हम उन्हें सहजता से स्वीकारना सीख लें, तो जीवन और अधिक सार्थक, संतुलित और प्रेरणादायक बन सकता है।
याद रखें
बदलाव ज़रूरी है, लेकिन खुद को खो देना नहीं।
आपकी पहचान ही आपकी सबसे बड़ी शक्ति है। 

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