क्या भारत में गैरकानूनी तरीके से रह रहे किसी अमेरिकी को जंजीरों में जकड़ कर वापस भेजा जाएगा : राउत
Focus News 2 April 2025 0
नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को शिवसेना (उबाठा) सदस्य संजय राउत ने आव्रजन पर लाए गए विधेयक को देश की छवि खराब करने वाला करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने सवाल किया कि जिस तरह अमेरिका से गैरकानूनी तरीके से रहने के आरोप में कई भारतीयों को जंजीरों में जकड़ कर वापस भेजा गया तो क्या भारत में गैरकानूनी तरीके से रहने के आरोपी किसी अमेरिकी के साथ भी ऐसा किया जाएगा?
उच्च सदन में आप्रवास एवं विदेशियों विषयक विधेयक, 2025 पर हो रही चर्चा में भाग लेते हुए संजय राउत ने कहा कि विधेयक पेश करते समय गृह मंत्री ने कहा कि यह देश न तो धर्मशाला है और न ही इसे धर्मशाला बनने देंगे। उन्होंने कहा ‘‘यह सही है कि यह देश धर्मशाला नहीं है लेकिन यह देश जेल भी नहीं है।’’
उन्होंने दावा किया कि दस साल से देश के लोगों को एक तरह से जेल में रखा गया है लेकिन अब विदेश से जायज वीजा लेकर जो विदेशी आएंगे उन्हें भी जेल में रखा जाएगा।
राउत ने कहा ‘‘हम नहीं चाहते कि कोई देश में गैरकानूनी तरीके से रहे चाहे वे बांग्लादेशी हों या रोहिंग्या। इनकी संख्या तीन करोड़ से अधिक है और उन्हें निकालना जरूरी है।’’
उन्होंने कहा कि अमेरिका से गैरकानूनी तरीके से रहने के आरोप में कई भारतीयों को जंजीरों में जकड़ कर वापस भेज दिया गया। उन्होंने सवाल किया कि क्या भारत में गैरकानूनी तरीके से रहने के आरोपी किसी अमेरिकी को भी उसी तरह जंजीरों में जकड़ कर अमेरिका वापस भेजा जाएगा।
उन्होंने कहा ‘‘नए कानून (विधेयक) में प्रावधान है कि भारत आए विदेशी अगर यहां किसी से मिलना चाहते हैं तो उन्हें सरकार से अनुमति लेनी होगी। सरकार चाहे तो अनुमति नहीं दे सकती है। कानून पहले भी थे लेकिन ऐसे कानून नहीं थे।’’
उन्होंने मांग की कि विधेयक को प्रवर समिति या स्थायी संसदीय समिति के पास भेजा जाए। उन्होंने कहा कि यह कानून देश की छवि खराब करेगा।
आईयूएमएल के हारिश बीरन ने कहा कि विधेयक में विदेशियों को गिरफ्तार किए जाने से पहले वारंट की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि ऐसा करने का कारण क्या है?
उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में विदेशी भारत में घूमने के लिए आते हैं, कई शिक्षा के लिए आते हैं, ‘‘मेरे राज्य केरल में लोग आयुर्वेद से इलाज के लिए आते हैं। विधेयक का सातवां उपबंध लोगों की आवाजाही को प्रतिबंधित करता है। अगर व्यक्ति अस्पताल जाएगा या होटल जाएगा तो अस्पताल प्रशासन या होटल प्रशासन इसके बारे में सूचना देगा। ऐसा क्यों?’’
उन्होंने आव्रजन अधिकारी के आदेश के खिलाफ अपील के लिए एक न्यायाधिकरण स्थापित किए जाने तथा विधेयक को प्रवर समिति या स्थायी समिति के पास भेजे जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि विधेयक मौलिक अधिकारों का हनन करता है।
भाजपा के केसरी देवसिंह झाला ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने इस विधेयक से पहले, कोई ऐसी ठोस व्यवस्था नहीं की जिससे विदेशियों की गैरकानूनी गतिविधियों को नियंत्रित करने या घुसपैठ के खिलाफ कड़े कदम उठाए जा सके।
उन्होंने कहा कि भारत आने वाले हर विदेशी का विवरण जानना नितांत आवश्यक है और यह विधेयक भारत आने वाले हर व्यक्ति पर कड़ी निगरानी सुनिश्चित करेगा कि वे भारत क्यों आते हैं और वे भारत में कितने समय तक रहना चाहते हैं।
झाला ने कहा ‘‘घुसपैठ ने असम में क्या स्थिति उत्पन्न की, यह सर्वविदित है। भारत में प्रवेश करने, यहां रहने या यहां से बाहर निकलने के लिए जाली पासपोर्ट या वीजा का इस्तेमाल करने वाले किसी भी व्यक्ति को न्यूनतम सजा दो साल की जेल और एक लाख रुपये का जुर्माना और अधिकतम सजा सात साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। ’’
भाजपा के ही मिशन रंजन दास ने कहा कि इस विधेयक में चार कानूनों को निरस्त करने का प्रस्ताव है जो क्रमश: पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम 1920,
विदेशियों का पंजीकरण अधिनियम 1939, विदेशी अधिनियम 1946 और आव्रजन (वाहक दायित्व) अधिनियम, 2000 के स्थान पर लाया जा रहा है जिसका उद्देश्य नियमों को सरल बनाना तथा विदेशी नागरिकों पर अधिक प्रभावी ढंग से नजर रखना होगा।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक “पुराने नियमों को बदलकर और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करके भारत के आव्रजन कानूनों को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
दास ने कहा कि असम में घुसपैठ रोकने के लिए एक कानून लागू था जिसमें घुसपैठ करने वालों को वापस भेजने और पाकिस्तान से दमन के बाद आए लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान था। उनके अनुसार, बाद में कानून में बदलाव किया गया और दोनों को बराबर दर्जा दे दिया गया जिससे अवैध घुसपैठियों को निष्कासित करना लगभग असंभव हो गया था।
उन्होंने कहा कि अवैध घुसपैठ की वजह से असम में उत्पन्न हालात के चलते वहां के मूल निवासियों के लिए ही समस्याएं खड़ी हो गईं।
इसी पार्टी के भुवनेश्वर कालिता ने कहा कि गहन विचार विमर्श के बाद लाए गए इस विधेयक को प्रवर समिति और चयन समिति में भेजे जाने की मांग करने से पहले हमें यह देखना होगा कि क्या पुराने, अप्रासंगिक हो चुके कानूनों को हटाया जाना आज की परिस्थितियों के अनुसार जरूरी नहीं है?
उन्होंने कहा कि यह कानून आव्रजन की प्रक्रिया को सरल बनाएगा और यह आव्रजन, विदेशी पंजीकरण और सुरक्षा नियंत्रण पर केंद्रित है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की डॉ फौजिया खान ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि इससे मूलभूत मानवाधिकारों का हनन होगा। उन्होंने कहा कि यह कहा गया है कि खतरा समझे जाने वाले विदेशी को गिरफ्तार किया जाएगा लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि खतरा किसके लिए होगा, देश के लिए या सरकार के लिए?