मणिपुर में हजारों शरणार्थी 60 के दशक से रह रहे हैं : बीरेन

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इंफाल, दो अप्रैल (भाषा) मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने बुधवार को कहा कि 1960 के दशक से हजारों शरणार्थी अधिकारियों की जानकारी में राज्य में आकर बसे हुए हैं और उन लोगों को पुनर्वास के लिए सहायता प्रदान की गई है।

सिंह ने आश्चर्य जताया कि उन परिवारों का क्या हुआ और क्या उन लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़े गए हैं?

सिंह ने मणिपुर के मुख्यमंत्री पद से फरवरी में इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था।

बीरेन सिंह ने यह टिप्पणी ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में की। मणिपुर के भाजपा विधायकों ने राज्य में परिसीमन करने से पहले 2001 की जनगणना की ‘‘समीक्षा’’ और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के कार्यान्वयन की मांग की थी।

इसके एक दिन बाद, पूर्व मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी आई है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते सिंह ने और केंद्र ने म्यांमा से आए अवैध प्रवासियों को राज्य में भड़की जातीय हिंसा के लिए बड़े पैमाने पर जिम्मेदार ठहराया था। इस हिंसा में मई 2023 से अब तक 250 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।

सिंह ने पोस्ट में कहा, ‘‘आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि हमारे पूर्ण राज्य बनने से पहले ही, हजारों शरणार्थियों को उस समय के अधिकारियों की जानकारी में यहां बसाया गया था। 1960 के दशक के अंत और 70 के दशक की शुरुआत में, दस्तावेजों से पता चलता है कि 1,500 से अधिक परिवार सीमा पार कर यहां आए थे और उन्हें पुनर्वास के लिए सहायता प्रदान की गई थी।’’

मणिपुर एक नवंबर, 1956 को केंद्र शासित प्रदेश बना और 21 जनवरी 1972 को इसे पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया।

सिंह ने पूछा, ‘‘उन परिवारों का क्या हुआ। तब से अब तक कितनी पीढ़ियां बड़ी हो गई हैं… क्या उन्हें अंततः पूर्ण अधिकार दे दिए गए? क्या उनके नाम मतदाता सूची में जोड़े गये?’’

भाजपा नेता ने दावा किया कि इन सवालों का कभी भी सार्वजनिक रूप से पूरी तरह से समाधान नहीं किया गया और इस मुद्दे पर काफी हद तक चुप्पी बनी रही जबकि राज्य की जनसांख्यिकीय संरचना पिछले कुछ वर्षों में बदल गई है।

उन्होंने कहा कि मणिपुर के तत्कालीन सांसद पाओकाई हाओकिप ने गृह राज्य मंत्री के.सी. पंत को एक पत्र लिखकर बताया था कि 1967 तक मणिपुर में 1,500 से अधिक शरणार्थी परिवार बस गये थे।

इसके साथ ही सिंह ने इस पत्र की एक प्रति सोशल मीडिया मंच पर साझा की।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘उनका (तत्कालीन सांसद का) पत्र कई पत्रों में से एक है, जो इस बात की पुष्टि करता है कि यह मुद्दा कितना गहरा है।’’

इस बात पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कि क्या मणिपुर ‘‘शुरू से ही शरणार्थियों के लिए डंपिंग ग्राउंड’’ था, सिंह ने कहा कि यह पूछना महत्वपूर्ण है कि क्या इन व्यक्तियों को शरणार्थी की स्थिति में बनाए रखने के लिए कोई कानूनी तंत्र था।

उन्होंने कहा, ‘‘क्या उन्हें स्वदेशी समुदायों के निर्धारित लाभ प्रदान किए गए थे? ये छोटी-मोटी बातें नहीं हैं, ये हमारी पहचान, हमारे सामाजिक संतुलन से जुड़ी हैं।’’

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