हिंदुत्व के नव-फासीवाद का मुकाबला करने की क्षमता केवल वामपंथियों में है: प्रकाश करात

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मदुरै (तमिलनाडु), दो अप्रैल (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के अंतरिम समन्वयक प्रकाश करात ने बुधवार को मदुरै में शुरू हुई 24वीं पार्टी कांग्रेस में कहा कि केवल वामपंथियों के पास ही हिंदुत्व के ‘‘नव-फासीवाद’’ से लड़ने और उसका मुकाबला करने की क्षमता है।

करात ने कहा कि माकपा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सामने एक वामपंथी और लोकतांत्रिक विकल्प बनाने की दिशा में काम करेगी।

पार्टी कांग्रेस की यह बैठक आगामी दिनों में माकपा की कार्यशैली की दिशा तय करेगी।

पार्टी कांग्रेस के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए करात ने कहा कि सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी की प्रकृति का अंदाजा तीन सवाल पूछकर लगाया जा सकता है – कौन डोनाल्ड ट्रंप (अमेरिका के राष्ट्रपति) का दोस्त होने का दावा करता है? गौतम अदाणी और मुकेश अंबानी का करीबी दोस्त कौन है? राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रति कौन वफादार है?

करात ने कहा, ‘‘इन तीनों सवालों के जवाब एक ही हैं — नरेन्द्र मोदी और भाजपा।’’

करात ने दावा किया कि मोदी सरकार ‘‘हिंदुत्व-कॉरपोरेट गठजोड़ का प्रतिनिधित्व करती है, जो अमेरिकी साम्राज्यवाद से निकटता से जुड़ा हुआ है’’। उन्होंने कहा कि अपने तीसरे कार्यकाल में सरकार ‘‘नव-फासीवादी विशेषताओं’’ को प्रदर्शित कर रही है, जिसमें मुस्लिम अल्पसंख्यकों को लगातार निशाना बनाना शामिल है।

करात ने कहा, ‘‘यह वामपंथ ही है जिसके पास हिंदुत्व नव-फासीवाद से लड़ने और उसका मुकाबला करने के लिए वैचारिक क्षमता और दृढ़ विश्वास है। केवल वामपंथी ही हमारे देश में साम्राज्यवादी ताकतों के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व कर सकते हैं। वामपंथी लोकतांत्रिक विकल्प बनाने के लिए माकपा सभी वामपंथी ताकतों के साथ मिलकर काम करेगी।

वरिष्ठ वामपंथी नेता ने यह भी कहा कि पार्टी कांग्रेस इस मुख्य मुद्दे पर विचार करेगी कि माकपा की ताकत कैसे बढ़ाई जाए। उन्होंने वाम एकता को मजबूत करने पर जोर दिया।

माकपा महासचिव डी. राजा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी लेनिनवादी) लिबरेशन (भाकपा-माले लिबरेशन) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) महासचिव मनोज भट्टाचार्य और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (एआईएफबी) महासचिव जी. देवराजन भी उद्घाटन सत्र में शामिल हुए।

‘अखिल भारतीय पार्टी कांग्रेस’ माकपा का सर्वोच्च अंग है जिसकी बैठक आमतौर पर हर तीन साल में एक बार माकपा की केंद्रीय समिति द्वारा बुलाई जाती है।

निवर्तमान केंद्रीय समिति एक नयी केंद्रीय समिति के चुनाव के लिए नामों की सिफारिश करेगी। समिति महासचिव सहित पोलित ब्यूरो के सदस्यों का भी चुनाव करेगी।

पिछले साल सीताराम येचुरी के निधन के बाद माकपा महासचिव का पद खाली हो गया था और करात ने पार्टी के अंतरिम समन्वयक के रूप में कार्यभार संभाला था।

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