प्रधानमंत्री मोदी व श्रीलंका के राष्ट्रपति दिसानायके ने वार्ता की, रक्षा साझेदारी समझौता हुआ

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कोलंबो, पांच अप्रैल (भाषा) भारत और श्रीलंका ने पहली बार सैन्य क्षेत्र में गहन सहयोग के लिए एक ढांचे को संस्थागत बनाने के संबंध में शनिवार को एक प्रमुख रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों की सुरक्षा एक दूसरे से जुड़ी हुई है और एक दूसरे पर निर्भर है।

प्रधानमंत्री मोदी और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के बीच वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने कुल सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें त्रिंकोमाली को ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित करने तथा पावर ग्रिड कनेक्टिविटी पर एक समझौता शामिल है।

बैठक में प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच मछुआरों के विवादास्पद मुद्दे को मानवीय दृष्टिकोण से सुलझाने की वकालत की और उम्मीद जताई कि श्रीलंका तमिल लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करेगा और प्रांतीय परिषद के चुनाव कराएगा।

अन्य महत्वपूर्ण कदमों में, भारत ने कोलंबो के लिए आर्थिक सहायता के एक भाग के रूप में ऋण पुनर्गठन समझौतों को भी मजबूत किया तथा ऋणों पर ब्याज दरों को कम करने का निर्णय लिया।

मोदी ने घोषणा की कि श्रीलंका के पूर्वी प्रांतों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए लगभग 2.4 अरब लंकाई रुपए का सहायता पैकेज प्रदान किया जाएगा।

मोदी-दिसानायके वार्ता में 10 से अधिक ठोस परिणाम सामने आए, रक्षा समझौते को रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह समझौता श्रीलंका में भारतीय शांति रक्षा सेना के हस्तक्षेप के लगभग 35 साल बाद हुआ है।

दिसानायके ने अपने वक्तव्य में कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को आश्वासन दिया है कि श्रीलंका अपने भूभाग का इस्तेमाल किसी भी तरह से भारत के सुरक्षा हितों के प्रतिकूल कदमों के लिए नहीं होने देगा।

मोदी ने मीडिया में जारी अपने वक्तव्य में कहा, ‘‘हमारा मानना ​​है कि हमारे सुरक्षा हित समान हैं। दोनों देशों की सुरक्षा एक दूसरे से जुड़ी हुई है और एक दूसरे पर निर्भर है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं भारत के हितों के प्रति राष्ट्रपति दिसानायके की संवेदनशीलता के लिए उनका आभारी हूं। हम रक्षा सहयोग के क्षेत्र में हुए महत्वपूर्ण समझौतों का स्वागत करते हैं।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच संबंध आपसी विश्वास और सद्भावना पर आधारित हैं तथा दोनों पक्ष दोनों देशों के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे।

मोदी ने कहा, ‘‘राष्ट्रपति दिसानायके ने राष्ट्रपति बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को चुना और मुझे उनका पहला विदेशी मेहमान बनने का सौभाग्य मिला। यह हमारे विशेष संबंधों की गहराई का प्रतीक है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘श्रीलंका का हमारी ‘पड़ोसी पहले नीति’ और ‘महासागर’ दृष्टिकोण दोनों में विशेष स्थान है। राष्ट्रपति दिसानायके की भारत यात्रा के बाद से पिछले चार महीनों में हमने अपने सहयोग में उल्लेखनीय प्रगति की है।’’

मोदी ने हाल में मॉरीशस की यात्रा के दौरान ‘ग्लोबल साउथ’ के साथ भारत के जुड़ाव के लिए ‘महासागर’ या ‘क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति’ परिकल्पना की घोषणा की।

‘ग्लोबल साउथ’ का आशय दुनिया के कमजोर या आर्थिक रूप से कम संपन्न देशों से है।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति दिसानायके ने सामपुर सौर ऊर्जा परियोजना का भी डिजिटल माध्यम से उद्घाटन किया।

मोदी ने कहा, ‘‘सामपुर सौर ऊर्जा संयंत्र श्रीलंका की ऊर्जा सुरक्षा के लिए सहायक होगा। बहु-उत्पाद पाइपलाइन के निर्माण और त्रिंकोमाली को ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए किए गए समझौतों से श्रीलंका के सभी लोगों को लाभ मिलेगा।’’

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ग्रिड अंतर-संपर्क समझौते से श्रीलंका के लिए बिजली निर्यात के विकल्प खुलेंगे। मोदी ने कहा कि भारत श्रीलंका की विशिष्ट डिजिटल पहचान परियोजना के लिए भी सहायता प्रदान करेगा।

अपने वक्तव्य में प्रधानमंत्री ने मछुआरों के मुद्दे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘‘हमने मछुआरों की आजीविका से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। हम इस बात पर सहमत हुए कि हमें इस मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। हमने मछुआरों और उनकी नावों की तत्काल छोड़ने पर भी जोर दिया।’’

तमिल मुद्दे का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने यह भी उम्मीद जताई कि श्रीलंका सरकार देश के संविधान को ‘‘पूरी तरह लागू’’ करेगी। मोदी ने कहा, ‘‘हमने श्रीलंका में पुनर्निर्माण और सुलह के बारे में भी बात की।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि श्रीलंका सरकार तमिल लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करेगी और श्रीलंका के संविधान को पूरी तरह लागू करने तथा प्रांतीय परिषद चुनाव कराने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करेगी।’’

श्रीलंका में तमिल समुदाय 13वें संशोधन के क्रियान्वयन की मांग कर रहा है, जो उन्हें सत्ता का हस्तांतरण प्रदान करता है। 13वां संशोधन 1987 के भारत-श्रीलंका समझौते के बाद लाया गया था।

मोदी ने श्रीलंका को आर्थिक संकट से बाहर निकालने में भारत की सहायता के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले छह महीनों में ही हमने 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक के ऋणों को अनुदान में बदल दिया है। हमारा द्विपक्षीय ‘ऋण पुनर्गठन समझौता’ श्रीलंका के लोगों को तत्काल सहायता और राहत प्रदान करेगा। आज हमने ब्याज दरें कम करने का भी फैसला किया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह इस बात का प्रतीक है कि आज भी भारत श्रीलंका के लोगों के साथ खड़ा है।’’

प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच बौद्ध संबंधों के बारे में भी बात की। मोदी ने कहा, ‘‘मुझे यह घोषणा करते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि मेरे गृह राज्य गुजरात के अरावली क्षेत्र में 1960 में मिले भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को प्रदर्शनी के लिए श्रीलंका भेजा जा रहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘भारत त्रिंकोमाली में थिरुकोनेश्वरम मंदिर के जीर्णोद्धार में सहायता करेगा। भारत अनुराधापुरा महाबोधि मंदिर परिसर में पवित्र शहर और नुवारा एलिया में सीता एलिया मंदिर के निर्माण में भी सहायता प्रदान करेगा।’’

मोदी बैंकॉक की यात्रा के बाद शुक्रवार शाम कोलंबो पहुंचे थे। उन्होंने बैंकॉक में बिम्सटेक (बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल) के शिखर सम्मेलन में भाग लिया था।

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