सरसों की आवक कम रहने के बावजूद सरसों तेल-तिलहन में गिरावट

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नयी दिल्ली, पांच अप्रैल (भाषा) मंडियों में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले सरसों की आवक कम रहने के बावजूद बाजार धारणा खराब रहने से देश के तेल-तिलहन बाजार में शनिवार को सरसों तेल-तिलहन में गिरावट दर्ज की गई।

खराब कारोबारी धारणा बने रहने और डी-आयल्ड केक (डीओसी) की कमजोर मांग के कारण सोयाबीन तिलहन तथा बिनौला तेल के दाम में भी गिरावट रही। सामान्य कारोबार के बीच मूंगफली तेल-तिलहन, सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल के दाम अपरिवर्तित बने रहे।

बाजार सूत्रों ने कहा कि ‘शुल्क युद्ध’ बढ़ने की आशंका के बीच कारोबार में तनाव बना हुआ है और बाजार धारणा बिगड़ी है। इसी वजह से सरसों की आवक शुक्रवार के लगभग 11 लाख बोरी से घटकर शनिवार को लगभग 10.50 लाख बोरी रह गई। इसके बावजूद बड़ी तेल मिलों द्वारा सरसों का दाम घटाने के कारण सरसों तेल तिलहन कीमतों में गिरावट दर्ज हुई। वस्तुस्थिति यह है कि किसान अपनी आवक रोक-रोक कर ही ला रहे हैं और जल्दबाजी से बच रहे हैं।

सूत्रों ने कहा कि डीओसी की मांग कमजोर रहने के बीच सोयाबीन तिलहन दाम में गिरावट देखने को मिली तथा खराब कारोबारी धारणा के कारण बिनौला तेल के दाम में भी गिरावट दर्ज हुई। बिनौले की उपलब्धता कम होने के बावजूद बिनौले में गिरावट आई है। तेल मिलें पेराई करना चाहती हैं पर डीओसी की मांग ना होने से उन्हें काफी परेशानी हो रही है। सोयाबीन में तेल 18 प्रतिशत और डीओसी 82 प्रतिशत निकलता है। जब तक डीओसी की मांग नहीं होगी, अकेले सोयाबीन की पेराई से कोई फायदा नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि मूंगफली और सोयाबीन की हालत गंभीर बनी हुई है क्योंकि दोनों के दाम एमएसपी से पर्याप्त नीचे हैं। बिजाई करने का समय भी नजदीक है और मंडियों में ना खपने की स्थिति बनी रही तो किसान लगभग एक महीने पहले तय कर लेते हैं कि उन्हें क्या बोना है जिससे उन्हें फायदा हो। सरकार को इन सब बारीकियों को ध्यान में रखकर कोई रास्ता ढूंढ़ना होगा अन्यथा सोयाबीन और मूंगफली की बुवाई प्रभावित होने का खतरा है।

सूत्रों ने कहा कि सोयाबीन तेल सबसे सस्ता है और यही वजह है कि बाजार धारणा कमजोर रहने के बावजूद सोयाबीन तेल के दाम पूर्वस्तर पर बने रहे।

उन्होंने कहा कि सोमवार को मलेशिया खुलने के बाद आगे की दिशा के बारे में कोई संकेत मिलेगा और फिलहाल सीपीओ और पामोलीन तेल के दाम पूर्ववत बने रहे।

तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 6,200-6,300 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 5,700-6,075 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 14,200 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल – 2,235-2,535 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 13,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,340-2,440 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,340-2,465 रुपये प्रति टिन।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,400 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,150 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 9,550 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 12,700 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 13,500 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 14,100 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 13,100 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 4,400-4,450 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 4,100-4,150 रुपये प्रति क्विंटल।

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