मदुरै, पांच अप्रैल (भाषा) केरल के मंत्री एम बी राजेश ने कहा है कि केरल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और ऐसे में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नीत वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने ‘नव केरल’ की अवधारणा पेश की है और भाजपा नीत केंद्र सरकार की बाधाओं के बीच राज्य सरकार निवेश के विकल्पों के साथ ‘साहसिक प्रयोग’ कर रही है।
राज्य में निजी विश्वविद्यालयों को अनुमति देने और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (पीएसयू) के पुनर्गठन के लिए निजी निवेश को आमंत्रित करने के हाल के फैसले पर पार्टी के भीतर आलोचना के बीच, राजेश ने इस बात से इनकार किया कि वामपंथी पार्टी अपनी नीतियों से भटक रही है।
‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक साक्षात्कार में मंत्री ने कहा कि उन्होंने पहले सरकारी विश्वविद्यालयों और पीएसयू को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया है।
राजेश ने कहा कि पहली कम्युनिस्ट नेतृत्व वाली सरकार ने 1957 में भूमि सुधार, शैक्षिक सुधार लागू किए और आधुनिक केरल की आधारशिला रखी थी। उन्होंने कहा कि यही वह आधार था जिस पर केरल का विकास मॉडल बनाया गया।
राजेश ने कहा, ‘‘ केरल के सामाजिक विकास और मानव विकास सूचकांकों की व्यापक रूप से सराहना की जाती है। लेकिन 1990 के दशक के प्रारंभ में हमें यह अहसास हुआ कि विकास के इस मॉडल की अपनी सीमाएं हैं और हमें इस मॉडल में सुधार करना होगा।’’
उन्होंने कहा, “हमने निर्णय लिया है कि अब हमें सामाजिक न्याय और समावेश के साथ आर्थिक विकास पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। इसलिए हमें बुनियादी ढांचे, सामाजिक क्षेत्रों और कल्याणकारी योजनाओं पर भारी निवेश करने की आवश्यकता है।’’
राजेश ने कहा, ‘‘साथ ही, हमें अधिक निवेश करने के लिए पर्याप्त संसाधन भी जुटाने होंगे।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य ‘‘भाजपा नीत केंद्र सरकार की शत्रुतापूर्ण नीतियों का शिकार’’ रहा है।
उन्होंने कहा, “हमारे लिए नव-उदारवादी नीति के अलावा कोई अन्य वैकल्पिक नीति अपनाना अत्यंत कठिन हो गया था। लेकिन हम इस दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं थे। इसलिए हम भाजपा नीत सरकार की ओर से डाली गई इन बाधाओं के बीच निवेश के विकल्पों के साथ ‘साहसिक प्रयोग’ कर रहे हैं।’’
राज्य द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि राजमार्गों, जल मेट्रो, डिजिटल विज्ञान पार्क, डिजिटल विश्वविद्यालय, स्कूलों, अस्पतालों में निवेश किया है और राज्य ने सामाजिक क्षेत्रों और कल्याणकारी योजनाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को कम नहीं किया है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की हालिया टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर, कि केरल में एलडीएफ और यूडीएफ सरकारों पर ‘‘गलत नीतियों” के कारण केरल में “राजकोषीय संकट” पैदा हुआ है, राजेश ने इस आरोप को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया।