नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा कि अमेरिका की ओर से चीन, वियतनाम, ताइवान, थाईलैंड और बांग्लादेश सहित कई एशियाई देशों पर उच्च जवाबी शुल्क लगाए जाने से भारत के लिए वैश्विक व्यापार और विनिर्माण में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर पैदा हुआ है।
जीटीआरआई ने कहा कि दवा, सेमीकंडक्टर, तांबा जैसी आवश्यक एवं रणनीतिक वस्तुओं और तेल, गैस, कोयला व तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) जैसे ऊर्जा उत्पादों को अमेरिका ने बुधवार को घोषित 27 प्रतिशत आयात शुल्क में छूट दी गई है जिनसे इन क्षेत्रों में भारत के लिए नए अवसर उत्पन्न हो सकते हैं।
शोध संस्थान ने कहा कि अमेरिका की जवाबी शुल्क व्यवस्था भारत के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पुनर्गठन से लाभ प्राप्त करने में मुख्य स्रोत का काम कर सकती है।
हालांकि, इन अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए भारत को कारोबार करने में आसानी बढ़ानी होगी, लॉजिस्टिक्स व बुनियादी ढांचे में निवेश करना होगा और नीतिगत स्थिरता कायम रखनी होगी।
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘ अगर ये कदम उठाए जाते हैं, तो भारत आने वाले वर्षों में एक प्रमुख वैश्विक विनिर्माण व निर्यात केंद्र बनने की स्थिति में होगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ ऐसी वस्तुएं हैं जिन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा उनमें दवा, सेमीकंडक्टर, तांबा जैसी आवश्यक और रणनीतिक वस्तुएं और तेल, गैस, कोयला व एलएनजी जैसे ऊर्जा उत्पाद शामिल हैं।’’
जीटीआरआई ने कहा कि अमेरिका के चीन, वियतनाम, ताइवान, थाइलैंड और बांग्लादेश सहित कई एशियाई देशों पर उच्च जवाबी शुल्क लगाए जाने से भारत के लिए वैश्विक व्यापार व विनिर्माण में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर उत्पन्न हुआ है।
श्रीवास्तव ने कहा कि हालांकि, लाभ स्वतः प्राप्त नहीं होंगे तथा भारत को लाभ उठाने के लिए बड़े पैमाने पर उत्पादन, घरेलू मूल्य संवर्धन व प्रतिस्पर्धात्मकता सुधार के लिए गहन सुधारों की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 27 प्रतिशत, अपेक्षाकृत कम जवाबी शुल्क दर निर्धारित की है जबकि चीन पर 54 प्रतिशत, वियतनाम पर 46 प्रतिशत, बांग्लादेश पर 37 प्रतिशत तथा थाइलैंड पर 36 प्रतिशत शुल्क दर निर्धारित की गई है….‘‘भारत को कई प्रमुख क्षेत्रों में स्वाभाविक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त हुआ है।’’
अमेरिका ने भारत पर 27 प्रतिशत का जवाबी शुल्क लगाने की दो अप्रैल घोषणा की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन का मानना है कि अमेरिकी वस्तुओं पर भारत उच्च आयात शुल्क वसूलता है, ऐसे में अब देश के व्यापार घाटे को कम करने और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था।
इस कदम से अमेरिका को भारत के निर्यात पर असर पड़ने के आसार हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में बेहतर स्थिति में है, जिन्हें हमसे अधिक शुल्क का सामना करना पड़ेगा।