निर्यातकों ने अमेरिकी शुल्क पर खरीदारों के साथ बातचीत शुरू की

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नयी दिल्ली, चार अप्रैल (भाषा) अमेरिका के नौ अप्रैल से भारतीय वस्तुओं पर 26 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने की घोषणा के बाद घरेलू निर्यातकों ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने इन उच्च दरों को वहन करने के तरीके तलाशने के लिए अपने अमेरिकी खरीदारों के साथ बातचीत शुरू कर दी है।

उन्होंने कहा कि भारतीय आपूर्तिकर्ताओं और अमेरिकी खरीददारों के बीच बातचीत पहले ही शुरू हो चुकी है, क्योंकि इन शुल्क से निर्यात तथा रोजगार सृजन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

भारतीय निर्यात संगठन महासंघ (फियो) के अध्यक्ष एस. सी. रल्हन ने कहा, ‘‘ हमें इस अभूतपूर्व स्थिति से निपटने के बारे में उनसे बात करनी होगी।’’

लुधियाना स्थित हैंड टूल (इंजीनियरिंग क्षेत्र की वस्तु) निर्यातक ने कहा कि घरेलू बाजार में इस्पात की उच्च लागत के कारण यह क्षेत्र उच्च शुल्क को वहन करने में सक्षम नहीं होगा।

रल्हन ने कहा, ‘‘ इस पर सरकार सुरक्षा शुल्क लगाने पर विचार कर रही है, उन्हें इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। अमेरिकी शुल्क मांग को प्रभावित करेगा।’’

उन्होंने कहा कि भारत में कुछ इस्पात की कीमतें पिछले पांच दिन में ही 50,000 अमेरिकी डॉलर प्रति टन से बढ़कर 55,000 अमेरिकी डॉलर प्रति टन हो गई हैं।

चमड़ा क्षेत्र के एक निर्यातक ने कहा कि उन्होंने इस मामले पर अमेरिकी खरीदारों के साथ बातचीत शुरू कर दी है।

भारत के प्रमुख जूता-चप्पल निर्यातक एवं फरीदा समूह के चेयरमैन रफीक अहमद ने कहा, ‘‘ शुल्क से अमेरिका में चमड़े के सामान की मांग प्रभावित होगी। खरीदार चाहते हैं कि हम उनके नुकसान को साझा करें। अमेरिकी खरीदारों ने हमसे कुछ समय के लिए उत्पादन रोकने को कहा है। वर्तमान में अमेरिका करीब 10 प्रतिशत शुल्क लगाता है।’’

उन्होंने कहा कि लंबे समय में इस क्षेत्र के लिए अमेरिकी बाजार का आकार छोटा हो जाएगा क्योंकि मांग में कमी आएगी।

ऊनी क्षेत्र से फियो के उपाध्यक्ष रविकांत कपूर ने कहा कि अब भारत को अमेरिकी उत्पादों के लिए शुल्क कम करने पर विचार करना चाहिए।

कपूर ने कहा, ‘‘ अमेरिका के लिए शुल्क में कटौती करना दीर्घावधि में हमारे लिए बेहतर होगा, क्योंकि अमेरिका, भारत का अच्छा व्यापारिक साझेदार है। घरेलू साज-सज्जा और कालीन के लिए अमेरिका हमारे लिए सबसे बड़ा बाजार है। वर्तमान शुल्क छह प्रतिशत है। हम इस मामले पर अपने खरीदारों से बात कर रहे हैं, क्योंकि हमें इस मुद्दे पर अधिक स्पष्टता की जरूरत है।’’

पानीपत स्थित कालीन निर्यातक ललित गोयल ने कहा कि कालीन क्षेत्र में भारत के प्रमुख प्रतिस्पर्धी तुर्किये और मिस्र हैं और अमेरिका ने उन पर केवल 10 प्रतिशत शुल्क लगाया है जबकि भारत पर 26 प्रतिशत शुल्क लगाया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत को इस क्षेत्र को उच्च शुल्क से बाहर निकालने के लिए अमेरिका से बात करनी चाहिए, क्योंकि इससे अमेरिका को हमारे निर्यात को नुकसान पहुंचेगा। इससे निपटने के लिए हमें नौकरियों में कटौती करनी पड़ सकती है। इस कारोबार से करीब 35 लाख लोग जुड़े हैं।’’

उन्होंने कहा कि हमारे कुल 16,000 करोड़ रुपये के निर्यात में ‘‘ अमेरिका की हिस्सेदारी 9,000 करोड़ रूपये है।’’

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