डीयू अगले छात्र संघ चुनावों में लिंगदोह समिति के दिशानिर्देशों को लागू करेगा: कुलपति योगेश सिंह

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नयी दिल्ली, चार अप्रैल (भाषा) दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के कुलपति योगेश सिंह ने कहा है कि विश्वविद्यालय लिंगदोह समिति के दिशानिर्देशों को लागू करेगा और डीयू के अगले छात्र संघ चुनाव सुचारू तरीके से कराने के लिए कहीं अधिक ‘‘सीमाएं और पाबंदियां’’ होंगी।

सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ साक्षात्कार में कहा, ‘‘किसी को भी दीवारों को विरूपित नहीं करना चाहिए। पिछले चुनावों में जो कुछ हुआ, जिसमें भारी मात्रा में धन और बाहुबल का इस्तेमाल हुआ, उसकी उम्मीद नहीं थी। अगली बार हम बदलाव देखेंगे। हम लिंगदोह समिति की सिफारिशों को लागू करेंगे।’’

उन्होंने छात्र राजनीति में कदाचार को रोकने के लिए किये गए नये उपायों के संदर्भ में कहा, ‘‘अब सीमाएं और प्रतिबंध होंगे।’’

सिंह ने छात्रों की चिंताओं को भी स्वीकार किया, जिन्हें लगता है कि चुनावों से शैक्षणिक गतिविधियां बाधित होती हैं। उन्होंने कहा, ‘‘बहुत से छात्र सिर्फ पढ़ाई करना चाहते हैं और उनका यह अधिकार बिना किसी व्यवधान के सुनिश्चित होना चाहिए।’’

गत वर्ष, दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा था कि दिल्ली विश्वविद्यालय और उसके कॉलेजों के अधिकारी लिंगदोह समिति के उन दिशानिर्देशों के वास्तविक महत्व को समझने में विफल रहे हैं, जो छात्र संघ (डूसु) चुनावों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और मुद्रित पोस्टरों के इस्तेमाल पर रोक लगाते हैं।

लिंगदोह समिति के दिशानिर्देशों के अनुसार, कोई भी उम्मीदवार 5,000 रुपये से अधिक खर्च नहीं कर सकता। साथ ही, यह भी कहा गया है कि उम्मीदवार अपने चुनाव प्रचार के लिए केवल छात्र संगठनों से मिलने वाले स्वैच्छिक योगदान का ही इस्तेमाल कर सकते हैं।

दिशानिर्देशों में उम्मीदवारों को प्रचार के लिए पोस्टर सहित किसी भी मुद्रित सामग्री का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी गई है। वित्तपोषण और चुनाव प्रचार के संबंध में अन्य सीमाएं भी लगाई गई हैं।

कुलपति ने डीयू का भगवाकरण किये जाने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शिक्षा से राष्ट्रीय गौरव की भावना पैदा होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘यह हमारा देश है। हम सभी इस देश के बच्चे हैं। शिक्षा प्रणाली को इस तरह की सोच बनानी चाहिए। अगले 25 वर्षों में भारत एक विकसित राष्ट्र होगा और हमारी चुनौतियां बहुत अलग होंगी। हमें ऐसे नागरिक चाहिए जो हमारे देश के हितों की रक्षा करें।’’

कुलपति ने वैचारिक पूर्वाग्रह रखने के आरोप को लेकर कहा, ‘‘हम पहले ही 800 साल गुलाम रहे हैं, हम नहीं चाहते कि ऐसा दोबारा हो। और अगर वे भगवा रंग की बात कर रहे हैं, तो भगवा त्याग, तपस्या और तप का रंग है, भारत का रंग है।’’

सिंह ने इन सुझावों को भी खारिज कर दिया कि डीयू साझा विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) से बाहर निकल सकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली से प्रवेश में अधिक विविधता और निष्पक्षता आई है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम सीयूईटी के माध्यम से आने वाले छात्रों के प्रदर्शन से बहुत संतुष्ट हैं। इससे बाहर निकलने का कोई सवाल ही नहीं है।’’

कुलपति ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर भी बात की।

अतीत में, एक साथ चुनाव पर चर्चा वाले कार्यक्रमों के खिलाफ विश्वविद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन देखने को मिला है।

‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘एक राष्ट्र, एक चुनाव एक अच्छा कदम है।’’

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