जलवायु चिंता भारत को लोगों की बुनियादी जरूरतों से समझौता करने पर मजबूर नहीं कर सकतीं: भूपेंद्र यादव

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नयी दिल्ली, 29 मार्च (भाषा) केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को कहा कि भारत को राष्ट्रीय परिस्थितियों के आधार पर जिम्मेदारी से विकास करने का अधिकार है और जलवायु परिवर्तन संबंधी चिंता उसे अपने लोगों के लिए भोजन, पानी एवं ऊर्जा सुनिश्चित करने के अधिकार को छोड़ने के लिए मजबूर नहीं कर सकती।

यादव ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा आयोजित पर्यावरण पर राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि विकासशील देशों के लिए जलवायु परिवर्तन से बचने का सबसे अच्छा तरीका तीव्र आर्थिक विकास है।

मंत्री ने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है और उसने 2030 के लक्ष्य से नौ वर्ष पहले ही हरित ऊर्जा पर पेरिस समझौते की प्रतिबद्धताओं को पूरा कर लिया है।

उन्होंने कहा, “भारत अपनी राष्ट्रीय परिस्थितियों के आधार पर जिम्मेदारी से विकास करने का अधिकार रखता है… लेकिन जलवायु संबंधी चिंता, जिसने दुनिया को जकड़ रखा है, भारत को अपने 140 करोड़ लोगों को भोजन, पानी, ऊर्जा सुनिश्चित करने के अधिकार को छोड़ने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। भारत चुनौतियों और अवसरों के बीच आत्मविश्वास के साथ संतुलन बना रहा है।”

मंत्री ने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता हानि और मरुस्थलीकरण की चुनौतियों से निपटने के लिए क्षमता निर्माण, ज्ञान साझा करने और विश्व के साथ सहयोग करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

उन्होंने कहा कि विश्व की सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में भारत न केवल अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करने, बल्कि हरित ऊर्जा क्षेत्र के माध्यम से लाखों नौकरियां पैदा करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।

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